मुंगेर: 40 शिवभक्तों का जत्था लेकर निकला 250 किलो की महाकाल कांवड़, हर कोई देख रहा यह अद्भुत नजारा बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के मुंगेर में एक अनोखी कांवड़ यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां कोलकाता से आए 40 शिवभक्त 250 किलो वजन वाली महाकाल कांवड़ के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं।

मुंगेर की सड़कों पर भक्ति का अनोखा संगम

बिहार के मुंगेर में इन दिनों आस्था का एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के अवसर पर हर साल लाखों भक्त बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के लिए देवघर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर एक विशेष कांवड़ यात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। कोलकाता से आए करीब 40 शिवभक्तों का एक दल 250 किलो वजन वाली महाकाल कांवड़ लेकर पैदल यात्रा कर रहा है।

महादेव के स्वरूप में सजी महाकाल कांवड़

यह महाकाल कांवड़ बेहद भव्य और आकर्षक है। इसे भगवान शिव के स्वरूप में बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया है। इसमें धार्मिक प्रतीकों और आकर्षक सजावट का एक अद्भुत संगम दिखाई देता है। जैसे ही यह टोली मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर पहुंची, स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु इसे देखने के लिए उमड़ पड़े। बड़ी संख्या में लोग अपने मोबाइल फोन पर इस अनूठी कांवड़ की तस्वीरें लेते और वीडियो बनाते हुए देखे गए। इस विशाल कांवड़ को ले जाने के लिए 40 श्रद्धालुओं की टीम बारी-बारी से कंधा बदल रही है, जिससे यात्रा अनवरत जारी है।

भक्ति के जयकारों से गूंज उठा पूरा मार्ग

कांवड़ियों का मानना है कि यह केवल एक कांवड़ नहीं, बल्कि भगवान महाकाल के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और अटूट आस्था का प्रमाण है। यात्रा के दौरान पूरे रास्ते बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। कांवरियों के मुताबिक, ऐसी धार्मिक यात्राएं इस बात का संदेश देती हैं कि सच्ची श्रद्धा के सामने कोई भी शारीरिक कठिनाई बड़ी नहीं होती है।

पहले भी दिखा भव्य कांवड़ का नजारा

मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर ऐसी अद्भुत कांवड़ का दिखना कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे एक दिन पहले ही 54 फीट लंबी एक विशाल कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच चर्चा में रही थी। पटना सिटी के श्री श्री विशाल शिवधारी संघ द्वारा तैयार इस भव्य कांवड़ को रंग-बिरंगी लाइटों, देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाओं और घुंघरुओं से सजाया गया था। इस कांवड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसे एक साथ 9 कांवरिए अपने कंधों पर उठाकर सुल्तानगंज से देवघर तक की लगभग 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर रहे थे। इस जत्थे में 500 से 600 श्रद्धालु शामिल थे, जो ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ इस सफर को शिवमय बना रहे थे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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