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एक घंटा पहले
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विकास की दौड़ में पीछे छूटा वाढ़ीव गांव
मुंबई के समीप पालघर तालुका में बसा वाढ़ीव गांव आज भी आधुनिक युग की बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। यहां के निवासियों के लिए सड़क का न होना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। चारों ओर से वैतरणा खाड़ी से घिरे इस गांव में लगभग 4 से 4.5 हजार लोग रहते हैं, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान की बाजी लगानी पड़ती है।
रेलवे पुल ही एकमात्र रास्ता
गांव से बाहर निकलने के लिए स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और मरीजों के पास पश्चिमी रेलवे के वैतरणा खाड़ी पुल के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। लोग रोजाना इसी खतरनाक पुल से होकर गुजरते हैं, जिससे हर वक्त दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस जानलेवा रास्ते का उपयोग करते समय अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है।
परियोजनाओं के बीच में फंसा गांव
हैरानी की बात यह है कि वाढ़ीव गांव के आसपास से कई बड़े प्रोजेक्ट गुजर रहे हैं। इसमें मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन परियोजना और पश्चिमी रेलवे की लाइनें शामिल हैं। भविष्य में यहां से तेज रफ्तार वाहन और बुलेट ट्रेन गुजरेंगी, लेकिन विडंबना देखिए कि स्थानीय लोगों के लिए अभी तक एक सुरक्षित सड़क मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है। गांव के लोग लंबे समय से सुरक्षित आवागमन के लिए सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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