महाराष्ट्र
3 घंटे पहले
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पोर्ट पर सुरक्षा का कड़ा पहरा
महाराष्ट्र के न्हावा शेवा पोर्ट पर स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी यानी जेएनपीए में हर दिन अरबों रुपये का व्यापार होता है। इस बंदरगाह पर जहां वैध रूप से माल की आवाजाही होती है, वहीं अवैध रूप से सामान निकालने के प्रयास भी होते रहते हैं। हालांकि, इन नाजायज गतिविधियों पर अब सीआईएसएफ के जवानों ने अपनी बाज जैसी पैनी नजरें गड़ा रखी हैं। सीआईएसएफ के जवान लगातार उन संदिग्ध कंटेनरों की तलाश में रहते हैं, जिन्हें गलत तरीके से पोर्ट से बाहर ले जाने की कोशिश की जाती है। हाल ही में हुई एक कार्रवाई इसी सतर्कता का नतीजा है, जिसने एक बड़े खेल को नाकाम कर दिया है।
छठी इंद्री और संदिग्ध कंटेनर
यह मामला उस समय सामने आया जब बंदरगाह से गुजर रहे एक कंटेनर को देखकर सीआईएसएफ के एक जवान को उस पर संदेह हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस कंटेनर को लेकर न तो कोई सिग्नल मिला था और न ही कहीं से कोई अलार्म या अलर्ट जारी हुआ था। इसके बावजूद, जवान को कंटेनर के आसपास के माहौल और वहां मौजूद कुछ लोगों की असामान्य गतिविधियों को देखकर लगा कि दाल में कुछ काला है। उसकी छठी इंद्री ने उसे संकेत दिया कि मामला गड़बड़ है। बिना समय बर्बाद किए जवान ने तुरंत अपने साथियों को सतर्क किया और बीच रास्ते में ही उस कंटेनर को रुकवा लिया। देखते ही देखते सीआईएसएफ के जवानों ने उस वाहन को अपने घेरे में ले लिया।
तलाशी और कस्टम्स का हस्तक्षेप
कड़ी सुरक्षा के बीच उस संदिग्ध कंटेनर को सीएफए यार्ड में लाया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कस्टम्स विभाग की एक विशेष टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। इसके बाद शुरू हुआ जांच का दौर, जिसने सभी की धड़कनें बढ़ा दी थीं। कस्टम्स की मौजूदगी में सबसे पहले कंटेनर को हाई पावर एक्स रे स्कैनर्स के जरिए जांचा गया। स्कैनिंग के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे दस्तावेजों में दर्ज विवरण से बिल्कुल अलग थीं। इसके बाद कंटेनर की सील तोड़ी गई और कटर की मदद से भारी लोहे के दरवाजे खोल दिए गए। सीआईएसएफ और कस्टम्स की टीम ने संयुक्त रूप से वहां फुल स्केल सर्च ऑपरेशन चलाया।
71.40 लाख का अवैध माल बरामद
कंटेनर के अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए। जब सामान की गिनती पूरी हुई, तो उसमें से 246 ब्रांड न्यू फ्रंट लोड वॉशिंग मशीनें निकलीं। इन मशीनों में 6 किलो क्षमता वाली 147 वाशिंग मशीनें और 8 किलो क्षमता वाली 99 वाशिंग मशीनें शामिल थीं। इन सभी मशीनों का बाजार मूल्य लगभग 71 लाख 40 हजार रुपये आंका गया है। अधिकारियों ने एक एक मशीन और उसके पुर्जों की बारीकी से तलाशी ली ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इन मशीनों की आड़ में कोई नशीला पदार्थ, हथियार या अन्य कोई तस्करी का प्रतिबंधित सामान तो नहीं छुपाया गया है। गनीमत रही कि ऐसी कोई अन्य संदिग्ध सामग्री वहां से नहीं मिली।
CISF के पास है सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी
गौरतलब है कि सीआईएसएफ को हाल ही में बंदरगाहों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड के तहत सीआईएसएफ को देश के सभी पोर्ट फैसिलिटीज के लिए रिकग्नाइज्ड सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन के तौर पर अधिकृत किया गया था। सीआईएसएफ को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी 6 मई 2026 को प्रदान की गई थी। वर्तमान में सीआईएसएफ देश के 13 बड़े बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को संभाल रही है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी भी शामिल है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सीआईएसएफ के जवानों की सजगता किसी भी आधुनिक तकनीक से कहीं अधिक प्रभावी हो सकती है।
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