जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता और एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री के रूप में देश की सेवा की। इतिहास में उन्हें ऐसे नायक के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने टुकड़ों में बंटे भारत को एक धागे में पिरोकर एकजुट किया। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कठोर निर्णयों के बल पर उन्हें लौह पुरुष की उपाधि मिली।
रियासतों के विलय में निभाई अहम भूमिका
आजादी के दौर में भारत में 560 से ज्यादा छोटी-बड़ी रियासतें मौजूद थीं। अंग्रेजों ने इन्हें यह स्वतंत्रता दे रखी थी कि वे चाहें तो भारत में शामिल हों, पाकिस्तान के साथ जाएं या स्वतंत्र बनी रहें। सरदार पटेल ने अपनी सूझबूझ और कूटनीति का सहारा लिया, और जहां आवश्यकता हुई वहां सैन्य शक्ति का प्रयोग करते हुए इन सभी रियासतों का भारत में विलय सुनिश्चित किया।
दृढ़ नेतृत्व की मिसाल
गुजरात की धरती से निकले वल्लभभाई पटेल अपनी अटूट इच्छाशक्ति और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं। उनके सशक्त व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर हर व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है। यहां पढ़िए उनके कुछ बहुमूल्य और प्रेरक विचार।
सरदार पटेल के प्रेरक विचार
- कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हर काम की अपनी गरिमा होती है।
- काम करते रहो, लेकिन जीवन में मुस्कुराना भी जरूरी है।
- जो व्यक्ति अपने अधिकार चाहता है, उसे अपने कर्तव्यों को भी याद रखना चाहिए।
- जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है, जो कठिनाइयों से घबराते न हो।
- विश्वास और दृढ़ निश्चय से बढ़कर कोई ताकत नहीं।
- जो व्यक्ति डरता है, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता।
- इंसान का चरित्र ही समाज और आगे चलकर इतिहास में उसकी पहचान बनाता है।
- निजी संदेह के क्षणों में सींचा हुआ, साहस चुपचाप पनपता है।
- राष्ट्र की एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।
- सच्चा धर्म वहीं है, जो हमें भाईचारे और एकता का संदेश दें।
- ग़रीबी में मनुष्य जितना बनता है, उतना अमीरी में नहीं बनता।
- देश की सेवा करने में जो मिठास है, वह और किसी चीज़ में नहीं है।
- भगवान सबसे दुःखी मनुष्यों में रहता है। वह महलों में नहीं जाता।
- कर्तव्यनिष्ठ पुरुष कभी निराश नहीं होता।
- जो आदमी सीधा नेता बन जाता है, वह किसी-न-किसी दिन लुढ़क जाता है।
- भगवान के आगे झुकना चाहिए, दूसरों के आगे नहीं झुकना चाहिए। हमारा सिर कभी न झुकनेवाला होना चाहिए। देहात में रहनेवाले लोग निर्भय होने चाहिए, इसके बजाय उनमें हमेशा डर होता है।
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