बिहार का अजीबोगरीब मामला: नौकरी के 10वें दिन ही जेल पहुंचा सिपाही, ठगों ने वर्दी पहनाकर स्टेशन पर खड़ा किया बिहार एक महीने पहले 84
मोतिहारी में एक युवक को पुलिस की नौकरी के नाम पर लाखों की चपत लगा दी गई, जिसके बाद उसे फर्जी वर्दी में स्टेशन पर ड्यूटी करनी पड़ी। अब असली पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है और ठगों की तलाश शुरू कर दी है।

मोतिहारी में पुलिस की वर्दी का बड़ा खेल

बिहार में अपराध और ठगी के मामले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन मोतिहारी से एक ऐसा किस्सा सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है कि बिहार कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है, और यह घटना उसी बात को सच साबित करती है। मोतिहारी में एक युवक को पुलिस की नौकरी का सपना दिखाकर न सिर्फ लाखों रुपये ऐंठ लिए गए, बल्कि उसे फर्जी वर्दी पहनाकर बापूधाम रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी करने तक भेज दिया गया।

कैसे शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

पुलिस हिरासत में मौजूद युवक की पहचान राजेपुर थाना क्षेत्र के इस्माइल गांव निवासी पवन कुमार के तौर पर हुई है। पूछताछ में पवन ने बताया कि वह पहले महाराष्ट्र में मजदूरी का काम किया करता था। वहीं पर उसकी मुलाकात पताही निवासी हरेंद्र राम से हुई। इस मुलाकात के बाद ठगी का जाल बिछाया गया। हरेंद्र राम ने पवन को झांसा दिया कि वह उसे बिहार पुलिस में भर्ती करवा सकता है। इस काम को अंजाम देने के लिए उसे पटना ले जाया गया, जहां उसकी मुलाकात वासुदेव राम से करवाई गई।

4 लाख रुपये की ठगी और वर्दी का झांसा

आरोपियों ने पवन कुमार का भरोसा जीतने के लिए उससे 4 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली। इसके बाद ठगों ने न केवल उसे पुलिस की वर्दी सिलवाकर दी, बल्कि उसे बापूधाम रेलवे स्टेशन पर तैनात भी कर दिया। पवन को पूरी तरह विश्वास हो गया था कि उसे सरकारी नौकरी मिल गई है। वह पिछले 10 दिनों से रोजाना मुजफ्फरपुर से ट्रेन पकड़कर मोतिहारी आता था और रेलवे स्टेशन पर पुलिसकर्मी बनकर ड्यूटी करता था। शाम होने पर वह वापस अपने घर लौट जाता था। उसने अपने गांव के लोगों और रिश्तेदारों को भी यही बताया था कि वह अब बिहार पुलिस का सिपाही बन चुका है।

संदेह और हकीकत का खुलासा

यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे पवन की गतिविधियों को लेकर असली पुलिस को कुछ संदेह हुआ। पुलिस ने जब उसके दस्तावेजों और बहाली के रिकॉर्ड की जांच शुरू की, तो पता चला कि बिहार पुलिस में ऐसी कोई बहाली ही नहीं हुई थी। इसके बाद नगर थाना पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। सदर एसडीपीओ दिलीप कुमार ने पुष्टि की कि युवक पुलिस में बहाल नहीं है और वह खुद एक बड़ी ठगी का शिकार हुआ है।

नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस

फिलहाल पुलिस अब उन ठगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस पूरी साजिश को रचा। पुलिस इस पूरे गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में लगी है ताकि यह पता चल सके कि इस गिरोह ने और कितने युवाओं को अपना शिकार बनाया है। पवन कुमार की कहानी एक सबक है कि सरकारी नौकरी के नाम पर चल रहे इस तरह के फर्जीवाड़ों से सावधान रहने की जरूरत है। पुलिस अब मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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