छत्तीसगढ़
एक महीने पहले
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मानसून में लौकी की खेती का संकट
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में इन दिनों लौकी की खेती करने वाले किसान एक गंभीर दौर से गुजर रहे हैं। खेतों में खड़ी लौकी की फसल पर लीफ माइनर और माहों जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि कई खेतों में लौकी के पौधे फूल आने की अवस्था में ही कीटों का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, फलों के बड़े होने के साथ ही उनमें सड़न और गलन की समस्या देखी जा रही है। मेहनत से उगाई गई फसल के बर्बाद होने के डर से किसान आर्थिक नुकसान की आशंका से घिरे हैं।
विशेषज्ञ ने बताए कीट नियंत्रण के तरीके
इस विकट स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि इस समय लौकी के पौधों को कीटों से बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। कीट नियंत्रण के लिए उन्होंने निम्नलिखित उपाय बताए हैं:
- लीफ माइनर और माहों के लिए: कीटों के खात्मे के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव काफी प्रभावी है। इसके अतिरिक्त, क्लोरपाइरीफॉस और साइपरमेथ्रिन के मिश्रण का छिड़काव करना भी कीटों को नियंत्रित करने में सफल रहता है।
- फल सड़न की रोकथाम: यदि लौकी के फलों में सड़न की शिकायत आ रही है, तो किसानों को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का उचित मात्रा में छिड़काव करना चाहिए।
खेती करने के तरीके में बदलाव की आवश्यकता
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव का मानना है कि लौकी की खेती के पारंपरिक तरीकों में थोड़ा बदलाव करने से फसल की गुणवत्ता काफी सुधर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लौकी एक बेल वाली फसल है और अक्सर किसान इसकी बेल को जमीन पर ही फैलने के लिए छोड़ देते हैं। जब लौकी के फल सीधे जमीन के संपर्क में आते हैं, तो नमी के कारण उनमें सड़न शुरू हो जाती है। इसे रोकने के लिए किसानों को बेलों को रस्सी, जाल या मजबूत बल्लियों की सहायता से मचान बनाकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन से ऊपर रहेंगे और कीटों व सड़न से सुरक्षित बने रहेंगे।
जैविक खेती और नीम का महत्व
रासायनिक दवाओं के अलावा, विशेषज्ञ ने जैविक उपायों पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि लंबे समय तक फसल को सुरक्षित रखने के लिए नीम के तेल का प्रयोग एक शानदार और किफायती विकल्प है। नीम के तेल का छिड़काव करने से न केवल लीफ माइनर जैसे हानिकारक कीटों का प्रभाव कम होता है, बल्कि मिट्टी और फसल की गुणवत्ता भी बनी रहती है। कई जागरूक किसान पहले से ही इस देसी नुस्खे को अपनाकर बेहतरीन परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
मुनाफे की गारंटी
लौकी की फसल में सही समय पर देखभाल और सावधानियां बरतने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और जैविक तरीकों का सही तालमेल बिठाकर काम करें, तो वे न केवल फसल को पूरी तरह नष्ट होने से बचा सकते हैं, बल्कि बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली लौकी बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों से खेती को अधिक उत्पादक और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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