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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान क्रिकेट में मची खलबली
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी मोहम्मद रिजवान इन दिनों भारी मुसीबत में घिरे हुए हैं। मामला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी के साथ सीधे टकराव का है, जिसने उनके खेल करियर पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल हो गया है कि रिजवान आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए मैदान पर दोबारा उतर पाएंगे या नहीं। बोर्ड के साथ उपजे इस विवाद ने पूरे क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर दी है।
मोबाइल फोन जब्ती और अदालती लड़ाई
विवाद की मुख्य वजह रिजवान और उनके साथी खिलाड़ी इमाम-उल-हक के मोबाइल फोन की जब्ती है। पीसीबी ने एक जांच के सिलसिले में इन दोनों खिलाड़ियों के फोन अपने कब्जे में ले लिए थे, जो अब तक उन्हें वापस नहीं मिले हैं। इस कार्रवाई से परेशान होकर रिजवान ने राहत पाने के लिए लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, अदालत ने इस मामले में तुरंत दखल देने या कोई राहत प्रदान करने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे खिलाड़ी के लिए स्थितियां और अधिक जटिल हो गई हैं।
अदालत का रुख और जांच का मसला
सुनवाई के दौरान लाहौर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश आलिया नीलम ने स्पष्ट रूप से कहा कि मोहम्मद रिजवान को जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए नोटिस का अनिवार्य रूप से जवाब देना चाहिए। रिजवान के कानूनी प्रतिनिधियों ने कोर्ट को बताया कि इंग्लैंड के लॉर्ड्स में आयोजित टेस्ट मैच के ठीक बाद उन्हें होटल की लॉबी में बुलाकर उनका फोन ले लिया गया था। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि महज तीन घंटे के भीतर फोन लौटा दिया जाएगा, लेकिन वह अवधि बीत जाने के बाद भी फोन वापस नहीं किया गया। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि क्रिकेट में भ्रष्टाचार संबंधी किसी भी मामले की निगरानी के लिए आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट पहले से ही सक्रिय है, फिर पीसीबी की ओर से इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है।
अगले सप्ताह तक आ सकती है रिपोर्ट
फिलहाल इन दोनों क्रिकेटरों के मोबाइल फोन एनसीसीआईए के पास हैं और उन पर गहन फॉरेन्सिक जांच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस जांच की रिपोर्ट अगले सप्ताह तक पीसीबी को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट के नतीजों पर ही रिजवान का भविष्य निर्भर करेगा। यदि जांच में सब कुछ सामान्य पाया जाता है, तो दोनों खिलाड़ियों को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन अगर कोई भी गड़बड़ी सामने आती है, तो पीसीबी की ओर से कड़ा अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाना तय है। यह मामला अब बहुत बड़ा हो चुका है और बोर्ड का शक अगर सही साबित हुआ तो खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
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