राष्ट्रीय राजनीति
2 महीने पहले
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भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क पर प्रहार करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक बेहद खतरनाक और सक्रिय हैंडलर मोहम्मद मुसादिक को आतंकी घोषित कर दिया है। मोहम्मद मुसादिक वही चेहरा है जिसने भारत के सबसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े धार्मिक एवं रणनीतिक स्थलों को दहलाने की बेहद घिनौनी साजिश रची थी। सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आतंकी के निशाने पर अयोध्या का ऐतिहासिक राम मंदिर परिसर, नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय और हरियाणा के पानीपत में स्थित देश की महत्वपूर्ण IOCL तेल रिफाइनरी थी।
आतंकी मोहम्मद मुसादिक का पूरा प्रोफाइल
सुरक्षा एजेंसियों की गहन जांच के बाद मोहम्मद मुसादिक की पहचान पूरी तरह स्थापित की गई है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस आतंकी की उम्र लगभग 38 साल है और वह मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया है कि कानून और सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए वह समय-समय पर अपने नाम बदलता रहता था। मुसादिक को सुरक्षा घेरे में कई अलग-अलग छद्म नामों से जाना जाता है, जिनमें डॉक्टर, अब्दुल मनन, सज्जाद, हमजा और वाहिद खान शामिल हैं। यह आतंकी लंबे समय से पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध चला रहा है और सीमावर्ती इलाकों में आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहा है।
राम मंदिर और RSS मुख्यालय समेत इन संवेदनशील जगहों की कराई थी रेकी
मोहम्मद मुसादिक का मुख्य काम भारत में बड़े पैमाने पर तबाही मचाने के लिए साजिशें तैयार करना था। उसने भारत के कई महत्वपूर्ण और अति-संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने की कोशिश की थी। मुसादिक ने खुद और अपने नेटवर्क के जरिए निम्नलिखित प्रमुख स्थानों की विस्तृत रेकी करवाई थी:
- अयोध्या का राम जन्मभूमि परिसर: इस पवित्र और संवेदनशील धार्मिक स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को परखने और वहां हमला करने का खाका तैयार करने के लिए रेकी की गई थी।
- नागपुर स्थित RSS मुख्यालय: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय की सुरक्षा की टोह ली गई ताकि किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम दिया जा सके।
- हरियाणा की पानीपत IOCL रिफाइनरी: देश की इस महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक संपत्ति को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी ताकि देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को चोट पहुंचाई जा सके।
इन सभी संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी करने के बाद मोहम्मद मुसादिक ने वहां के नक्शे, सुरक्षा प्रबंधों और अन्य आवश्यक जानकारियों को पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया था। एजेंसियों की मानें तो JeM इस जानकारी के बल पर एक बड़े हवाई और जमीनी हमले की योजना बना रहा था। इसके लिए ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री भारत में भेजने की भी कोशिशें की गई थीं।
सुरंगों के जरिए घुसपैठ और सुंजवां आतंकी हमला
मोहम्मद मुसादिक केवल साजिशें ही नहीं रचता था, बल्कि वह जमीनी स्तर पर आतंकियों को भारतीय सीमा में दाखिल कराने के लिए भी जिम्मेदार था। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे जम्मू-कश्मीर के लसियाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर बताया है। वह सीमा पार से आतंकियों की अवैध घुसपैठ कराने के लिए कुख्यात रहा है। इसके लिए वह सीमावर्ती इलाकों में फैले अपने स्थानीय मददगारों और गाइडों की मदद लेता था। मुसादिक ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर घुसपैठ करने के लिए कई गुप्त सुरंगों का भी इस्तेमाल किया था।
इसके अलावा, मोहम्मद मुसादिक का नाम साल 2022 में हुए एक बड़े आतंकी हमले से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुंजवां इलाके में देश के सुरक्षा बलों पर एक कायराना आतंकी हमला हुआ था। इस हमले को JeM के आतंकवादियों ने अंजाम दिया था, जिसकी पूरी कमान और समन्वय का जिम्मा मोहम्मद मुसादिक के हाथों में ही था। इस हमले के बाद से ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हुई थीं।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश और साइबर नेटवर्क
मोहम्मद मुसादिक का आतंक फैलाने का तरीका केवल हथियारों और घुसपैठ तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह डिजिटल दुनिया में भी बेहद सक्रिय था। वह युवाओं को गुमराह करने और उन्हें आतंक की राह पर धकेलने के लिए एक विशेष साइबर टीम का संचालन करता था। इंटरनेट, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से वह जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों के युवाओं को निशाना बनाता था। वह अपनी इस साइबर टीम के जरिए भड़काऊ प्रचार सामग्री फैलाता था और भोले-भाले युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें JeM के आतंकी संगठन में भर्ती होने के लिए उकसाता था। इस तरह उसने युवाओं को देश के खिलाफ खड़ा करने का एक बड़ा ऑनलाइन जाल बुन रखा था।
सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और UAPA के तहत कार्रवाई
आतंकवाद के प्रति देश की बेहद सख्त नीति का परिचय देते हुए केंद्र सरकार ने अब मोहम्मद मुसादिक को UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत आधिकारिक तौर पर एक आतंकवादी घोषित कर दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले के बाद भारतीय सुरक्षा और वित्तीय जांच एजेंसियों को मुसादिक के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। अब एजेंसियां मुसादिक से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन, उसके मददगारों, उसकी संपत्ति और उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाने वाले पूरे तंत्र के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर सकेंगी।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' यानी शून्य सहिष्णुता की नीति का एक अहम हिस्सा है। इसी राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत पिछले कुछ समय में JeM और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कई बड़े गुर्गों को आतंकी घोषित किया जा चुका है, ताकि भारत की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने वाले हर एक चेहरे को बेनकाब कर उसे कानून के शिकंजे में कसा जा सके।
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