ब्रिक्स देशों को मध्य पूर्व में शांति के लिए आगे आना चाहिए, ट्रंप के मनमाने टैरिफ का हो विरोध: शी जिनपिंग भारत 2 घंटे पहले 6
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मध्य पूर्व के युद्ध को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया और साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों का विरोध करने की अपील की।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मंच से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक स्तर पर शांति और आर्थिक स्थिरता को लेकर एक बड़ा संदेश दिया है। चीनी राष्ट्रपति ने मध्य पूर्व में जारी हिंसक संघर्षों को रोकने के लिए ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों से एक सक्रिय शांतिदूत की भूमिका निभाने की जोरदार अपील की। चीनी सरकारी टीवी चैनल CCTV के अनुसार, शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन इस महत्वपूर्ण शांति पहल में सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि यह युद्ध अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि चीन अगले वर्ष इस प्रतिष्ठित समूह की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेगा।

मध्य पूर्व के युद्ध और संप्रभुता के सम्मान पर दिया जोर

शी जिनपिंग ने वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के हालातों पर काबू पाना बेहद जरूरी है। चीनी राष्ट्रपति के मुताबिक, इस युद्ध के चलते पूरे क्षेत्र की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रिक्स देशों को वैश्विक शांति स्थापित करने में अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। जिनपिंग ने सभी सदस्य देशों से किसी भी देश की संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा विरोध करने का आग्रह किया और स्पष्ट रूप से कहा कि हर तरह के संरक्षणवाद को सिरे से खारिज किया जाना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और तकनीकी सहयोग पर निशाना

लगभग सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर कदम रखने वाले शी जिनपिंग ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा। ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले दंडात्मक और मनमाने टैरिफ का उल्लेख करते हुए चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों से एकजुट होकर इसका मुकाबला करने की अपील की। इसके साथ ही, उन्होंने भविष्य की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने सदस्य देशों से इस आधुनिक तकनीक का उपयोग कर नए औद्योगिक विकास को गति देने का आग्रह किया।

सात साल बाद भारत की यात्रा और द्विपक्षीय संबंधों का उतार-चढ़ाव

शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा राजनयिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद के कारण तनाव बना हुआ था। दोनों देशों के बीच संबंधों के इस घटनाक्रम को निम्नलिखित महत्वपूर्ण पड़ावों के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इससे पहले आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत के दौरे पर आए थे।
  • उस समय चेन्नई के पास ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बेहद अनौपचारिक और महत्वपूर्ण शिखर बैठक हुई थी।
  • इसके बाद जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिससे रिश्तों में भारी कड़वाहट आ गई थी।
  • गलवान संघर्ष के बाद दोनों ही देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों पर भारी संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती कर दी थी, जिससे द्विपक्षीय संबंध काफी समय तक प्रभावित रहे।
  • राजनयिक प्रयासों के बाद दोनों नेताओं के बीच बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ, जिसके तहत अक्टूबर 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी।
  • इसके बाद अगस्त 2025 में तियानजिन में आयोजित SCO की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भी दोनों शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई थी।
  • इसी बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को साल 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का आधिकारिक न्योता दिया था, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण दौरा संभव हो पाया है।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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