औषधीय खेती से बदली तकदीर: 50 हजार लगाकर रोज हजारों कमा रहे अंबाला के किसान अजय सिंह हरियाणा एक घंटा पहले 2
अंबाला के बराड़ा क्षेत्र के किसान अजय सिंह ने डेढ़ एकड़ जमीन पर औषधीय पौधों की खेती शुरू की और शुरुआती करीब 50 हजार रुपये के खर्च से अब प्रतिदिन हजारों रुपये की आय हासिल कर रहे हैं।

खेती में लगातार बढ़ती लागत, गिरते भूजल स्तर और परंपरागत फसलों से मिलने वाले सीमित मुनाफे के बीच अब किसान वैकल्पिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में औषधीय और बागवानी फसलें किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का नया जरिया बनकर उभरी हैं। अंबाला जिले के बराड़ा क्षेत्र के किसान अजय सिंह इसका जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने डेढ़ एकड़ भूमि में औषधीय पौधों की खेती कर अपनी आय तो बढ़ाई ही, साथ ही अन्य किसानों के सामने भी एक नई राह रख दी है।

क्यों बढ़ रही औषधीय फसलों की मांग

आयुर्वेद और प्राकृतिक उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के कारण भूमि आंवला, लेमनग्रास, अश्वगंधा, मोरिंगा और शतावरी जैसी औषधीय फसलों का बाजार निरंतर फैल रहा है। यही वजह रही कि अजय सिंह ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ अपनी जमीन पर इन औषधीय पौधों की बागवानी शुरू कर दी। सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास आज एक लाभदायक मॉडल बनकर सामने आया है और उनके उत्पाद प्रदेश से बाहर भी पहुंच रहे हैं।

प्राकृतिक तरीके से तैयार होती फसल

लोकल स्तर पर बातचीत में अजय सिंह बताते हैं कि वह लंबे समय से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। औषधीय पौधों को तैयार करने के लिए वह गोबर की देसी खाद और बायोगैस स्लरी का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार इन पौधों को पूरी तरह विकसित होने में करीब एक वर्ष लगता है, लेकिन एक बार तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक इनसे उत्पादन लिया जा सकता है। यही कारण है कि इनके रखरखाव की लागत भी तुलनात्मक रूप से कम रहती है।

एक एकड़ में 400 मोरिंगा के पेड़

अजय सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन पर करीब 400 मोरिंगा के पेड़ लगाए हुए हैं। इनकी पत्तियों और फलियों को प्रोसेस कर वह पाउडर के रूप में बाजार में बेचते हैं। इसके अलावा अश्वगंधा, लेमनग्रास और शतावरी जैसी औषधीय फसलों की भी बाजार में अच्छी मांग बनी हुई है।

50 हजार के निवेश से रोज हजारों की कमाई

इन औषधीय पौधों की बागवानी में शुरुआत में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब यही खेती उन्हें प्रतिदिन हजारों रुपये की आमदनी दे रही है। खास बात यह है कि औषधीय और बागवानी फसलें पानी की खपत भी कम करती हैं। अजय सिंह के अनुसार उनके खेत में तैयार होने वाले उत्पाद हिमाचल प्रदेश, पंजाब और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

उनका कहना है कि बाजार में औषधीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। यदि किसान सही जानकारी और तकनीक के साथ इस क्षेत्र में कदम रखें तो वे लाखों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

सरकार दे रही सब्सिडी

हरियाणा सरकार बागवानी किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसान मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल और हरियाणा बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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