मुजफ्फरपुर के किसान श्रीकांत का कमाल, 400 से ज्यादा औषधीय पौधों की खेती से कर रहे कमाई बिहार एक महीने पहले 52
मुजफ्फरपुर के रहने वाले श्रीकांत कुशवाहा ने अपने खेतों में 400 से अधिक प्रकार के औषधीय पौधे उगाकर मिसाल कायम की है। ये पौधे न केवल गंभीर बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो रहे हैं, बल्कि किसानों के लिए कमाई का एक शानदार जरिया भी बन गए हैं।

औषधीय पौधों का अनूठा संसार

आज के दौर में जब लोग एलोपैथी दवाओं के साथ ही प्राकृतिक और आयुर्वेद की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, तब बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के किसान श्रीकांत कुशवाहा एक नई प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपने कृषि क्षेत्र में लगभग 400 तरह के दुर्लभ और गुणकारी औषधीय पौधों का संरक्षण और उत्पादन किया है। श्रीकांत की यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए भी वरदान साबित हो रही है। उनके बागान में मौजूद औषधीय पौधों की विविधता ने आसपास के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

गोखरू की अहमियत और उपयोगिता

श्रीकांत कुशवाहा विशेष रूप से गोखरू, जिसे स्थानीय बोली में हाथी चिकार भी कहा जाता है, की खेती पर जोर देते हैं। उनका दावा है कि यह पौधा कई तरह की शारीरिक समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। श्रीकांत के अनुसार, यह पौधा हृदय रोगों और किडनी से संबंधित बीमारियों में काफी असरदार माना जाता है। सही तरीके और सही मात्रा में इसका सेवन करने से मरीजों को काफी राहत मिल सकती है। हालांकि, वे बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से पहले किसी अनुभवी आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है। खुद से दवा शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।

आयुर्वेद में गोखरू का महत्व

श्रीकांत ने बताया कि गोखरू का उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में किया जा रहा है। यह पौधा मूत्र संबंधी विकारों को दूर करने, यूरिन इन्फेक्शन यानी UTI जैसी समस्याओं में रामबाण औषधि की तरह कार्य करता है। इसके अलावा, पुरुषों की शारीरिक शक्ति बढ़ाने और प्रजनन क्षमता में सुधार लाने के लिए भी इसका उपयोग आयुर्वेद की दवाओं में बड़े पैमाने पर होता है। श्रीकांत का मानना है कि यदि हम प्राकृतिक औषधियों का समझदारी से उपयोग करें, तो जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता

औषधीय पौधों की खेती केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी काफी फायदेमंद है। श्रीकांत कुशवाहा ने बताया कि गोखरू की सूखी पत्तियों की बाजार में भारी मांग है और यह लगभग 600 रुपये प्रति किलो तक बिकती हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में, औषधीय पौधों की खेती किसानों की आय में बड़ा उछाल ला सकती है। लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए, श्रीकांत अन्य किसानों को भी सलाह देते हैं कि वे अपनी परंपरागत खेती के साथ औषधीय पौधों को भी शामिल करें।

जागरूकता का केंद्र बना बागान

श्रीकांत के इस प्रयास को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग उनके बागान में पहुंचते हैं। वे न केवल इन पौधों का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि लोगों को इनके औषधीय गुणों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस दिशा में जोड़ना है ताकि औषधीय पौधों का संरक्षण भी हो सके और किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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