अमेरिकी चुनावों में भारतीय मॉडल का जलवा, ट्रंप की तारीफ पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी चुनावी सुधारों के लिए भारत की चुनाव प्रक्रिया का उदाहरण देने पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और मजबूती वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य है।

वैश्विक मंच पर भारतीय चुनाव प्रणाली की धमक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय चुनाव प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे अमेरिका के लिए एक आदर्श मॉडल बताया है। ट्रंप के इस बयान के बाद अब भारत के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख सामने आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत की चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता और मजबूती एक स्थापित तथ्य है, जिसे पूरी दुनिया मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो सम्मान है, वह इसकी पारदर्शी कार्यप्रणाली का परिणाम है।

ट्रंप ने क्यों की भारतीय मॉडल की वकालत?

अमेरिका में आगामी चुनावों को लेकर जारी बहस के बीच डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में चुनावी सुधारों को लेकर काफी मुखर हैं। वह अमेरिका में SAVE America Act को पारित कराने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने बताया कि जब उनकी चर्चा हुई, तो उन्होंने भारत की मजबूत फोटो पहचान पत्र प्रणाली के बारे में विस्तार से जाना।

64 करोड़ मतदाताओं की मिसाल

ट्रंप ने अपने बयान में भारत के विशाल चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए अमेरिकी सांसदों को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा कि भारत के पिछले आम चुनाव में 64.6 करोड़ से अधिक नागरिकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। ट्रंप के अनुसार, इतनी विशाल आबादी के बावजूद मतदान प्रक्रिया में डाक मतपत्रों का इस्तेमाल 1 फीसदी से भी कम रहा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत में हर मतदाता के पास अपना वैध फोटो पहचान पत्र मौजूद होता है। ट्रंप ने इसी व्यवस्था को अमेरिकी चुनाव प्रणाली में लागू करने के लिए सांसदों से SAVE America Act को जल्द से जल्द पास करने की अपील की है।

विपक्ष के अपने तर्क और चुनौतियां

जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रशंसा हो रही है, वहीं भारत के भीतर विपक्षी दल इसे लेकर अक्सर अपनी चिंताएं जताते रहे हैं। प्रमुख विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने समय-समय पर निम्नलिखित मुद्दों को उठाया है:

  • EVM बनाम बैलेट पेपर: विपक्षी नेता अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM की कार्यप्रणाली, उसमें इस्तेमाल होने वाली चिप की सुरक्षा और VVPAT की शत-प्रतिशत पर्चियों की गिनती की मांग को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं।
  • वोटर लिस्ट में बदलाव: चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले एसआईआर कार्यक्रमों पर भी विपक्षी दलों ने निशाना साधा है। उनका आरोप है कि जानबूझकर उन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं जिनकी राजनीतिक विचारधारा वर्तमान सरकार से मेल नहीं खाती है।

विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख

जब मीडिया ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस बारे में पूछा कि वे ट्रंप की टिप्पणी को कैसे देखते हैं, तो उन्होंने बहुत सधे हुए शब्दों में जवाब दिया। जायसवाल ने कहा कि वे किसी व्यक्ति के निजी बयानों पर कोई अलग से टिप्पणी करना आवश्यक नहीं समझते, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारतीय चुनाव प्रक्रिया की मजबूती पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। भारत की चुनाव प्रणाली न केवल पारदर्शी है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने में सक्षम है। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान यह साबित करता है कि भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं दुनिया भर के विकसित देशों के लिए भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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