जलवायु परिवर्तन के बीच आम की खेती से कमाएं मुनाफा, सरकार दे रही है 50,000 रुपये तक की सब्सिडी मध्य प्रदेश एक महीने पहले 55
बदलते मौसम के दौर में पारंपरिक खेती के बजाय आम का बगीचा लगाना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, जिस पर सरकार प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दे रही है।

जलवायु परिवर्तन और खेती पर संकट

मौजूदा समय में जलवायु परिवर्तन का सबसे गहरा असर खेती किसानी पर पड़ रहा है। जो किसान अभी भी पुराने ढंग से पारंपरिक फसल चक्र अपनाकर खेती कर रहे हैं, उनके लिए अब मुनाफा कमाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कभी बेमौसम भारी बारिश तो कभी सूखे की स्थिति किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण अक्सर पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक किसानों को विविध प्रकार की फसलें उगाने की सलाह दे रहे हैं। इससे यदि एक फसल को किसी कारणवश नुकसान होता है, तो दूसरी फसल से उसकी भरपाई हो सके। इसी क्रम में अब सरकार भी किसानों को फल उद्यान लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

आम की खेती पर सरकारी सब्सिडी

सागर और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में किसान आम की खेती के प्रति काफी रुचि दिखा रहे हैं। किसानों की मदद के लिए बागवानी विभाग आगे आया है। विभाग की ओर से आम का बगीचा लगाने पर किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सागर जिले के बागवानी विभाग के उप संचालक पी एस बडोले ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसान सबसे पहले MPFST पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कराएं। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित योजना का चयन कर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड और बी1-बी2 खसरा की नकल जमा करना अनिवार्य है।

सब्सिडी का भुगतान और प्रक्रिया

डॉक्टर बडोले के अनुसार, सरकार की ओर से मिलने वाली यह सब्सिडी दो किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। पहले साल में 30,000 रुपये और दूसरे साल में 20,000 रुपये का भुगतान किया जाता है, इस तरह कुल 50,000 रुपये की राशि दी जाती है। सरकार द्वारा अनुदान के रूप में पौधे भी उपलब्ध कराए जाते हैं, हालांकि किसान अपनी पसंद के अनुसार निजी नर्सरी से भी पौधे खरीद सकते हैं।

पौधे लगाने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

आम का बगीचा तैयार करते समय तकनीक का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सामान्य तौर पर एक हेक्टेयर में 100 पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उच्च घनत्व तकनीक अपनाकर इनकी संख्या को 400 तक ले जाया जा सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे उच्च घनत्व विधि और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करें। इसमें पौधों के बीच चार बाय चार मीटर की दूरी रखना काफी प्रभावी रहता है। इसके अतिरिक्त, बागवानी प्रबंधन के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था का होना बहुत जरूरी है। मिट्टी के प्रकार को देखते हुए निर्णय लेना चाहिए। गहरी काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में आम के पौधे बेहतर पनपते हैं, जबकि हल्की जमीन वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञों की सलाह पर अन्य फलों के पौधों का चुनाव करना चाहिए।

प्रमुख आम किस्में

इस क्षेत्र के लिए आम की कई उन्नत किस्में उपयुक्त मानी गई हैं, जिनमें आम्रपाली, लंगड़ा, तोतापरी, दशहरी और हाफूस शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ प्रगतिशील किसानों ने मियाजाकी किस्म के आम भी लगाए हैं, जिसके काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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