PoK के प्रदर्शनकारियों को 'भारत जैसा दुश्मन' मानने वाले ख्वाजा आसिफ का शर्मनाक बयान विश्व एक घंटा पहले 4
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सेना की कार्रवाई को सही ठहराते हुए प्रदर्शनकारियों को दुश्मन करार दिया है। क्षेत्र में जारी हिंसा के कारण अब तक 80 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

PoK में दमन और ख्वाजा आसिफ का विवादित रुख

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तानी सेना की ओर से किए जा रहे कत्लेआम को लेकर दुनिया भर में कड़ी निंदा हो रही है। इस कठिन समय में, जब वहां के आम नागरिक अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बेहद चौंकाने वाला और असंवेदनशील बयान दिया है। अपनी जिम्मेदारी और पद की गरिमा को दरकिनार करते हुए, ख्वाजा आसिफ ने उन निहत्थे नागरिकों के खिलाफ सेना द्वारा की जा रही गोलीबारी का समर्थन किया है जो रावलकोट और मीरपुर में सड़कों पर हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वे इन प्रदर्शनकारियों को भारत के समान अपना दुश्मन मानते हैं और इनके साथ बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

प्रदर्शनकारियों को भारत की श्रेणी में रखने की बेशर्मी

रावलकोट और मीरपुर में हो रही मौतों और हिंसा पर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी हो रही है, वहीं ख्वाजा आसिफ ने सेना प्रमुख मुनीर के बचाव में उतरकर आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने मीडिया के सामने बेझिझक बयान दिया कि वे तथाकथित आजाद कश्मीर के प्रदर्शनकारियों को उसी श्रेणी में रखते हैं जिसमें भारत आता है। उन्होंने उन्हें 'भारत जैसा दुश्मन' करार दिया है। इस बयान से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान की सत्ता और वहां की सेना PoK के बाशिंदों को अपना नागरिक मानने के बजाय उन्हें शत्रु मानकर उनके ऊपर गोलियां बरसा रही है। एक तरफ पाकिस्तान के नेता दिखावटी चुनावी ड्रामे में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ आम जनता अपनी बुनियादी सुविधाओं, जैसे सस्ती बिजली और खाने-पीने की जरूरी चीजों के लिए आवाज उठा रही है, जिसे बर्बरता से कुचला जा रहा है।

हिंसा में 80 से अधिक लोगों की मौत

PoK के हालात दिनों-दिन बेकाबू होते जा रहे हैं और वहां की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। 5 जून से शुरू हुए इन विरोध प्रदर्शनों के बाद से पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई कार्रवाई में अब तक 80 से ज्यादा निहत्थे लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल सोमवार को हुई हिंसा और गोलीबारी में 25 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसके ठीक बाद मीरपुर में सेना ने हैवानियत की सभी हदें पार करते हुए मंगलवार को प्रदर्शनकारी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस ताजा घटना में 12 नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई और 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

अस्पतालों की सीलिंग और मानवीय संकट

रावलकोट और मीरपुर की सड़कों पर इस समय खून और लाशों का मंजर है। वहां मौजूद चश्मदीदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तानी सेना असॉल्ट राइफलों और स्नाइपर्स का इस्तेमाल सीधे निहत्थे लोगों के सिर और सीने को निशाना बनाने के लिए कर रही है। स्थिति इतनी विकट है कि एंबुलेंस की भारी कमी के कारण स्थानीय लोग अपने घायल परिजनों को कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हैं। मानवीय क्रूरता की पराकाष्ठा यह है कि सेना ने कई अस्पतालों को सील कर दिया है ताकि घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिल सके और उनकी तड़पकर मौत हो जाए। पाकिस्तान का यह रवैया उसके अपने लोगों के प्रति उसकी नफरत और संवेदनहीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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