तृणमूल में ममता बनर्जी का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, सायोनी घोष और माला राय की छुट्टी पश्चिम बंगाल एक घंटा पहले 2
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की युवा और महिला शाखा में बड़ा फेरबदल करते हुए सायोनी घोष समेत कई नेताओं को उनके पदों से हटा दिया है। यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ते बागी असंतोष के बीच उठाया गया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के संगठन में व्यापक स्तर पर फेरबदल को अंजाम दिया है। पार्टी की युवा और महिला इकाई में अहम बदलाव करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं, वहीं कुछ वरिष्ठ चेहरों को जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। यह उलटफेर ऐसे वक्त सामने आया है जब 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद टीएमसी के भीतर अंदरूनी नाराजगी और राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

युवा और महिला इकाई में बड़ा उलटफेर

पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते ही बड़े संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत सांसद सायोनी घोष को टीएमसी की युवा इकाई का अध्यक्ष दोबारा बनाया था। लेकिन महज एक सप्ताह के अंदर ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह अर्नब बनर्जी को युवा इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसी क्रम में कोलकाता दक्षिण की सांसद माला राय को भी महिला इकाई 'तृणमूल महिला कांग्रेस' के अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया है, और उनके स्थान पर कालिगंज की विधायक अलिफा अहमद को कमान सौंपी गई है।

बागी खेमे से जुड़ी हैं दोनों नेता

सायोनी घोष और माला राय को लेकर पार्टी के भीतर यह चर्चा जोरों पर है कि वे लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों के समूह में शामिल हो चुकी हैं। यह बागी खेमा पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध खुलकर सामने आ चुका है और सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की तैयारी में है। यह गुट संसद में खुद को 'असली टीएमसी' के तौर पर मान्यता दिलाने की मांग रखने वाला है। असंतुष्ट सांसदों का दावा है कि 28 लोकसभा सांसदों में से करीब 20 उनके साथ खड़े हैं, और इनमें सायोनी घोष तथा माला राय के नाम भी गिनाए जा रहे हैं।

पार्टी के भीतर गहराता विवाद

पार्टी के एक वरिष्ठ राज्यसभा सांसद ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि ये फैसले तीन दिन पहले हुई पार्टी बैठक में ही तय हो चुके थे। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, 'ममता दीदी ने लोगों को दूध और केला देकर पाला, लेकिन वे सांप निकले।' यह टिप्पणी कथित तौर पर 20 बागी सांसदों के संदर्भ में की गई। इस बीच टीएमसी की बागी सांसद काकली घोष दस्तीदार ने यह भी दावा किया है कि उनके गुट को एक बार मान्यता मिल जाने के बाद वे संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन दे सकते हैं।

इससे पहले भी हुआ था व्यापक फेरबदल

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 5 जून को ममता बनर्जी ने राज्य में टीएमसी की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को भंग करते हुए नई संगठनात्मक संरचना खड़ी की थी। उस दौरान उन्होंने कई पुराने नेताओं और भरोसेमंद साथियों को नई भूमिकाएं सौंपी थीं। इसी बदलाव के अंतर्गत पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनके भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को दोबारा जिम्मेदारी दी थी।

सुदीप की जगह कुणाल घोष को कमान

ताजा फेरबदल में कोलकाता के टीएमसी सांसद कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है। यह पद इससे पहले सुदीप बंद्योपाध्याय के पास था। कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी ने हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। बताया जा रहा है कि सुदीप भी शनिवार को बागी खेमे में शामिल हो गए थे। इसके साथ ही वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को टीएमसी की लोकसभा इकाई का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। फिलहाल इस इकाई में पार्टी के सिर्फ 8 सांसद ही ममता बनर्जी के प्रति वफादार बताए जा रहे हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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