परीक्षा में गड़बड़ी पर नया बिल महज दिखावा, PM मोदी खुद आकर दें सफाई: मल्लिकार्जुन खड़गे भारत एक घंटा पहले 3
राज्यसभा में परीक्षा सुधार बिल पर बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ युवाओं के आक्रोश को शांत करने की एक चाल है।

सरकार पर खड़गे का तीखा हमला

लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद, गुरुवार को राज्यसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 को पेश किया गया। इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा किया। खड़गे का स्पष्ट आरोप है कि सरकार यह विधेयक केवल परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों के बढ़ते गुस्से और विरोध को नियंत्रित करने के लिए लेकर आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बिल के जरिए समस्या का असली समाधान नहीं निकलने वाला है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे संसद में आकर इस पूरे मामले पर अपनी बात रखें और देश को जवाब दें।

पुराने नियमों का ही नया रूप

खड़गे ने बिल की आलोचना करते हुए इसे पुराना और अप्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि इस नए बिल में कुछ भी नयापन नहीं है, बल्कि पुराने कानूनों में मामूली बदलाव करके इसे पेश किया गया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से निर्दोष छात्रों ने भारी पीड़ा सही है। सरकार ने इसमें स्पेशल टास्क फोर्स, कठोर दंड और फास्ट-ट्रैक अदालतों जैसे प्रावधान तो जोड़े हैं, लेकिन खड़गे के अनुसार, महज कड़े कानूनों से कुछ नहीं होगा जब तक परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया में आधारभूत बदलाव नहीं किया जाएगा। खड़गे ने याद दिलाया कि विपक्ष ने साल 2024 में ही एक मजबूत कानून की वकालत की थी, जिसे उस समय नजरअंदाज कर दिया गया था।

युवाओं के आंदोलन को दबाने की कोशिश

सदन में खड़गे ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून पेपर लीक रोकने के लिए नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे युवाओं को शांत करने के लिए एक हथकंडा है। जब छात्र आंदोलन कर रहे थे, तब सरकार ने उनके साथ बातचीत करने का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष लगातार साल 2024 से ही यह मुद्दा उठा रहा है, लेकिन सरकार ने तब छात्रों की आवाज सुनने के बजाय लाठियों का सहारा लिया। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों को क्यों बंद किया गया था।

धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर सवाल

खड़गे ने गृहमंत्री से भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने शिक्षामंत्री के पद से हटने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के संसद में स्वागत को लेकर भी सवाल खड़े किए। राज्यसभा में चर्चा के दौरान जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। जब विपक्ष ने नीट जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाया, तो केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस का कार्य है, जिस पर सदन में भारी हंगामा हुआ।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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