उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
लाइसेंस धारकों के लिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद अहम टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि बंदूक का लाइसेंस एक विशेषाधिकार है, जिसका इस्तेमाल शादी, विवाह या किसी अन्य धार्मिक आयोजनों में खुशी जताने के नाम पर हवाई फायरिंग करने के लिए बिल्कुल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई लाइसेंस धारक ऐसा करता है, तो यह स्पष्ट रूप से शस्त्र लाइसेंस की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा।
कारतूसों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रत्येक लाइसेंस धारक की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह खरीदे गए और खर्च किए गए सभी कारतूसों का व्यवस्थित रिकॉर्ड अपने पास रखे। यह फैसला जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने अखिलेश कुमार द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया है। गौरतलब है कि प्रशासन ने याची का शस्त्र लाइसेंस इसलिए रद्द कर दिया था क्योंकि वह अपने पास मौजूद 857 कारतूसों में से 757 का सही हिसाब-किताब नहीं दे सका था। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए इस कार्रवाई पर अपनी मुहर लगा दी है।
नोएडा की घटना और हर्ष फायरिंग का खतरा
देश भर में हर्ष फायरिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाएं एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। दिसंबर 2025 में नोएडा के सेक्टर 93 स्थित एक बारात घर से लापरवाही का ऐसा ही एक मामला सामने आया था। उस दौरान शादी समारोह में पिस्टल लोड करते समय अचानक गोली चल गई थी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और मेहमान बाल-बाल बच गए थे।
कानून का पालन करने की जरूरत
अक्सर देखा जाता है कि शादी, जन्मदिन और अन्य उत्सवों के दौरान लोग उत्साह में आकर अंधाधुंध हर्ष फायरिंग करते हैं। ऐसी घटनाओं में कई बार बेगुनाह लोगों की जान चली जाती है, जिनका उस विवाद या कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध नहीं होता। प्रशासन द्वारा समय-समय पर हर्ष फायरिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं और चेतावनी दी जाती है, फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अब हाई कोर्ट के इस कड़े निर्देश के बाद प्रशासन और पुलिस की सक्रियता और सख्त होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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