रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव, DRDO की मिसाइल तकनीक का अब भारतीय कंपनियां करेंगी उत्पादन भारत 4 घंटे पहले 3
भारत सरकार ने रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की मिसाइल तकनीकों को भारतीय उद्योगों को सौंपने की अनुमति दे दी है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

भारत सरकार ने देश के रक्षा क्षेत्र को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक निर्णायक नीतिगत फैसला लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक रूप से यह मंजूरी दे दी है कि DRDO द्वारा विकसित की गई सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक अब भारतीय कंपनियों को हस्तांतरित की जाएगी। इस कदम का सीधा असर देश की रक्षा निर्माण क्षमता पर पड़ेगा और इससे भारतीय उद्योग स्वदेशी स्तर पर मिसाइल निर्माण करने में सक्षम हो सकेंगे।

भारतीय उद्योगों को मिलेगा तकनीक का अधिकार

यह तकनीक हस्तांतरण प्रक्रिया उन सभी भारतीय उद्योगों के लिए खुली है जो इसके लिए निर्धारित योग्यता, प्रमाणन और सभी जरूरी नियामकीय मानकों को पूरा करते हैं। इस निर्णय के माध्यम से अब रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान से लेकर अंतिम औद्योगिक उत्पादन तक का सफर और अधिक सुगम हो जाएगा। यह पहल DRDO के उस लंबे समय से चले आ रहे संकल्प को भी दर्शाती है, जिसके जरिए उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण में निजी क्षेत्र की प्रतिभा और उनकी औद्योगिक क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

आपूर्ति श्रृंखला और MSMEs के लिए नए द्वार

इस नीति के कार्यान्वयन से भारत के घरेलू रक्षा विनिर्माण आधार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करना है। इस नई व्यवस्था से न केवल बड़ी कंपनियों को, बल्कि MSMEs और अन्य तकनीकी रूप से सक्षम साझेदारों को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने के नए और सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे।

वैश्विक पोत निर्माण और भविष्य की रणनीति

मिसाइल तकनीक के हस्तांतरण के साथ ही रक्षा मंत्री ने पोत निर्माण के क्षेत्र में भारत की क्षमता पर भी जोर दिया है। हाल ही में उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और यंत्र इंडिया लिमिटेड की कुल पांच विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला ऑनलाइन रखी। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर पोत निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार, दुनिया के कई पारंपरिक पोत निर्माता देशों में उत्पादन की गति कम हो रही है, जिससे पैदा हुए खालीपन का लाभ उठाकर भारत अपनी पहचान बना सकता है।

इसके अलावा, 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के माध्यम से देश के जांबाज सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों में आए बदलावों और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की ओर हुई प्रगति का विस्तार से उल्लेख किया। सरकार का यह प्रयास भारतीय रक्षा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा माध्यम साबित होगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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