मंदिर के लिए ईंट चुराने गए पुजारी को हुआ साक्षात हनुमान का अनुभव, मधुबनी में खड़ा कर दिया भव्य पंचमुखी हनुमान मंदिर बिहार एक घंटा पहले 6
मधुबनी गांव में हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बाईपास किनारे स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय है। मंदिर के पुजारी जनार्दन पंडित के अनुसार करीब 10 वर्ष पहले ईंट चुराने के दौरान हुए एक आध्यात्मिक अनुभव ने उनका जीवन ही बदल दिया।

मधुबनी गांव में हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बाईपास के किनारे बना पंचमुखी हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। मान्यता है कि यहां सच्चे हृदय से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। पुत्र की कामना, सरकारी नौकरी, घर-परिवार में सुख-शांति और जीवन की विकट परिस्थितियों से छुटकारे के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर बाबा के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं।

ईंट चुराने गए और मिला अद्भुत अनुभव

मंदिर के मुख्य पुजारी जनार्दन पंडित बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक अनोखी और आध्यात्मिक घटना जुड़ी है। उनके मुताबिक करीब 10 वर्ष पहले उनके घर के सामने एक छोटा-सा हनुमान मंदिर हुआ करता था। उसी मंदिर की मरम्मत के इरादे से वे किसी व्यक्ति की रखी हुई ईंट बिना अनुमति के उठाने पहुंच गए थे। उन्हीं क्षणों में उन्हें साक्षात हनुमान जी के दर्शन का अनुभव हुआ।

जनार्दन पंडित के अनुसार उस वक्त उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो उनके दोनों हाथ जंजीरों में बंध गए हों और हनुमान जी उन्हें अपनी सेवा में लगने की प्रेरणा दे रहे हों। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।

गलती स्वीकार कर शुरू की सेवा

पुजारी का कहना है कि इस अनुभव के बाद उन्होंने अपनी भूल मानी और घर लौटकर अपनी जमीन पर हनुमान जी की एक छोटी प्रतिमा स्थापित कर दी। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से पूजा-पाठ और भोग लगाना आरंभ कर दिया।

वर्षों तक सेवा करते रहने के बाद एक दिन अचानक उनके पुत्र की तबीयत बेहद बिगड़ गई। परिवार के लोग उम्मीद छोड़ चुके थे, तभी रात में जनार्दन पंडित को स्वप्न में फिर हनुमान जी के दर्शन हुए। स्वप्न में हनुमान जी ने मंदिर बनवाने का संकेत देते हुए कहा कि उन्हें उचित स्थान दिया जाए।

जमीन की कीमत 70 से 80 लाख, फिर भी कर दी समर्पित

इसके बाद जनार्दन पंडित ने उसी भूमि पर पंचमुखी हनुमान मंदिर बनवाने का संकल्प लिया और लगभग एक वर्ष की मेहनत के बाद मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। बताया जाता है कि वर्तमान में जिस भूमि पर मंदिर बना है, उसकी बाजार कीमत 70 से 80 लाख रुपये प्रति कट्ठा है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पूरी जमीन मंदिर को समर्पित कर दी।

हर मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा

मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। यहां श्रद्धालु भोजपत्र पर अपनी मनोकामना लिखकर अर्जी लगाते हैं और नारियल बांधकर मन्नत मांगते हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार नेपाल और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से भी भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं।

रामनवमी के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन के साथ मेला भी लगता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा की कृपा से यहां आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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