मधुबनी में तेजी से आकार ले रहा सरकारी मेडिकल कॉलेज, जानिए निर्माण की स्थिति और पढ़ाई शुरू होने का अनुमान बिहार एक महीने पहले 59
बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में बन रहे सरकारी मेडिकल कॉलेज का काम अंतिम चरण में है। करीब 500 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे इस संस्थान के बनने से मिथिलांचल के छात्रों को अब मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

मिथिलांचल का सपना हो रहा साकार

बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाले लोगों का वर्षों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने की दहलीज पर है। झंझारपुर में निर्माणाधीन गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का काम लगभग पूरा होने को है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। जिले के छात्र-छात्राओं को अब एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों या राज्यों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद न केवल छात्रों को लाभ मिलेगा, बल्कि दरभंगा, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जैसे पड़ोसी जिलों के निवासियों को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में सुलभ हो सकेंगी।

परियोजना का स्वरूप और बजट

यह भव्य मेडिकल कॉलेज परिसर करीब 22 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2020 में सरकारी स्वीकृति मिली थी, जिसके बाद लगभग 500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद जिले के लोगों में काफी उत्साह देखा गया था, लेकिन बीच में कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से काम की गति प्रभावित हुई। विशेष रूप से वर्ष 2023 में सरकार में आए बदलावों के बाद फंड आवंटन और निविदा प्रक्रिया में आई बाधाओं के कारण निर्माण कार्य कुछ समय के लिए ठप हो गया था। हालांकि, अब सारी अड़चनों को दूर करते हुए निर्माण कार्य को दोबारा पूरी रफ्तार दी गई है और यह अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

क्या-क्या तैयार हुआ और क्या बाकी है

निर्माण स्थल की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए इंजीनियरों और निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि परिसर का अधिकांश आधारभूत ढांचा बनकर तैयार है। जिन प्रमुख संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनमें मुख्य अकादमिक बिल्डिंग, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल, इंटर्न हॉस्टल, रेजिडेंशियल ब्लॉक, एसी प्लांट, मंदिर और पूरे परिसर की चारदीवारी शामिल हैं। इतना ही नहीं, परिसर के भीतर सड़क निर्माण का लगभग आधा काम भी पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में केवल अस्पताल भवन की आठवीं मंजिल और कुछ अंतिम फिनिशिंग के कार्य शेष बचे हैं। इन कार्यों के पूरा होते ही पूरी परियोजना का निर्माण कार्य संपन्न मान लिया जाएगा।

कब तक शुरू होगी पढ़ाई?

निर्माण कार्य की मौजूदा गति को देखते हुए एजेंसी का दावा है कि इस वर्ष के अंत तक पूरे प्रोजेक्ट को हैंडओवर करने की तैयारी है। जैसे ही भवन निर्माण और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचों का काम पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा, चाबी संबंधित विभाग को सौंप दी जाएगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के संचालन से जुड़ी अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मिथिलांचल के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि जिले में मेडिकल कॉलेज होने से न केवल मरीजों को इलाज में आसानी होगी, बल्कि मेडिकल छात्रों के लिए भी यह एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। अब सभी की निगाहें इस साल के अंत पर टिकी हैं, जब इस मेडिकल कॉलेज की इमारत पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी और अस्पताल के उद्घाटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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