बिहार
एक घंटा पहले
2
विचारों
बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बनकट्टा-दामोदरपुर को आज आदर्श गांव के नाम से जाना जाता है। कभी पिछड़ा कहे जाने वाले इस गांव को सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने गोद लिया था। ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए यह जानने की कोशिश की गई कि बीते वर्षों में इस गांव में कितना और क्या बदलाव आया।
क्या थी केंद्र सरकार की योजना
केंद्र सरकार ने 2014 में एक योजना शुरू की थी, जिसके तहत हर सांसद को एक पिछड़े क्षेत्र या गांव को गोद लेकर उसका विकास करना था। गोद लिए गए गांव में शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, पानी और नाले जैसी हर छोटी-बड़ी समस्या को दूर कर उसे आत्मनिर्भर बनाना इस योजना का लक्ष्य था। सरल शब्दों में कहें तो सांसदों को गांव को अपने बच्चे की तरह संवारना था।
2014 में लिया गया था गोद
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड स्थित बनकट्टा-दामोदरपुर को 2014 में सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने गोद लिया था। इस पिछड़े गांव को विकसित करने की बात कही गई और इसे आदर्श ग्राम की संज्ञा दी गई।
दो साल चला काम, फिर थम गई रफ्तार
गांव के लोगों के अनुसार, जब गांव को गोद लिया गया तो 2014 से 2016 तक यानी दो साल यहां काम हुआ। इस दौरान बनकट्टा-दामोदरपुर में पंचायत भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बने तथा कुछ छोटे-मोटे काम हुए। ग्रामीणों का कहना है कि उसके बाद से बीते दस सालों में इस गांव में कोई काम नहीं हुआ है।
लोगों के दिल में आज भी हैं सांसद
गांव के करीब दर्जन भर लोगों से बातचीत में सबने अपनी-अपनी राय रखी। कुछ लोगों का कहना है कि सांसद हुकुमदेव नारायण यादव अब इस क्षेत्र से नहीं हैं, फिर भी वे आज भी लोगों के दिल में बसे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि वे विकास करें या न करें, लेकिन लोगों से मिलते जरूर थे। उनके दुख को अपना समझकर मिलना, सहानुभूति जताना और उनके लिए काम करना उनकी पहचान थी। ग्रामीणों के मुताबिक उनके बेटे अशोक कुमार यादव अब इस क्षेत्र से सांसद हैं, लेकिन वे कभी गांव नहीं आते।
कुछ हद तक बदली तस्वीर
बनकट्टा-दामोदरपुर को मधुबनी जिले के आदर्श ग्राम की संज्ञा दी गई है। योजना के अनुसार जैसा आदर्श गांव विकसित होना चाहिए था, वैसा भले न हुआ हो, लेकिन जिस तरह यह अति पिछड़ा गांव था, उसमें थोड़ा बदलाव जरूर आया है। अब इस क्षेत्र के लोग पढ़ने लगे हैं और विद्यालय की स्थिति भी बेहतर है।
Comments
0 comment