मिशन 2027: सुभासपा की 63 सीटों पर दावेदारी से गरमाई यूपी की सियासत, सपा का तंज, BJP का पलटवार उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 48
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सुभासपा के 63 सीटों पर तैयारी के संकेत ने एनडीए में सीट बंटवारे की बहस छेड़ दी है। सपा ने तंज कसा तो योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने गठबंधन की एकजुटता का दावा किया।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से जोर पकड़ने लगी हैं और सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है। गठबंधन में शामिल दल अपने-अपने आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) द्वारा प्रदेश की 63 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक और चुनावी तैयारी तेज करने की खबर ने सियासी माहौल को अचानक गरमा दिया है। पार्टी के इस कदम को भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के भीतर बड़ी हिस्सेदारी के दावे के रूप में देखा जा रहा है।

सपा का तंज: 'बड़े दावे, पर हैसियत एक-दो सीट की'

सुभासपा की जमीनी तैयारी और 63 सीटों के संकेत पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने तीखा हमला बोला है। सपा नेताओं का कहना है कि गठबंधन की मजबूरियों के बीच भाजपा सुभासपा को महज एक या दो सीटें देकर ही संतुष्ट कर देगी। विपक्ष का तर्क है कि सुभासपा की वास्तविक राजनीतिक हैसियत और उसके बड़े-बड़े दावों के बीच जमीन-आसमान का फर्क है। सपा इसे ओमप्रकाश राजभर की केवल 'दबाव बनाने वाली राजनीति' करार दे रही है।

मंत्री दानिश आजाद अंसारी का पलटवार

सपा के हमलावर बयानों पर जवाब देने में सरकार ने देर नहीं की। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने एनडीए की एकजुटता का दावा करते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया।

एनडीए पूरी तरह एकजुट है और मजबूती के साथ जनता के बीच खड़ा है। भाजपा और उसके सहयोगी दल विकास, सुशासन और जनहित के एजेंडे पर मिलकर काम कर रहे हैं। विपक्ष चाहे जितने भी कयास लगा ले, 2027 में भी जनता का आशीर्वाद सिर्फ और सिर्फ एनडीए को ही मिलेगा।

'परिवारवाद और तुष्टिकरण को नकार चुकी है जनता'

विपक्ष को घेरते हुए मंत्री दानिश आजाद ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण की पुरानी राजनीति को पूरी तरह खारिज कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए के सभी घटक दल मैदान में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, इसका अंतिम फैसला उचित समय आने पर गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व मिलकर तय करेगा।

दबाव की राजनीति या हिस्सेदारी का दावा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में भले ही अभी समय है, लेकिन सुभासपा का 63 सीटों पर ध्यान केंद्रित करना एक सोची-समझी 'प्रेशर पॉलिटिक्स' का हिस्सा है। इसके जरिए पार्टी आगामी चुनाव में भाजपा के सामने अपने मनमुताबिक सीट बंटवारे के लिए अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाना चाहती है। फिलहाल 2027 की चुनावी जंग भले ही दूर हो, लेकिन सीटों के गणित और दावों-प्रतिदावों ने यूपी के सियासी अखाड़े में अभी से चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा दिया है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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