गुस्सा बादशाहत नहीं, कमजोरी का संकेत? सवालों के घेरे में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल के बीच टकराव चर्चा में है। बिजली बिल बढ़ोतरी और संविदा कर्मियों की छंटनी पर मंत्री की नाराजगी और बार-बार सार्वजनिक गुस्से ने नई बहस छेड़ दी है।

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा इन दिनों लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। मंत्री और UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल के बीच चल रहा विवाद सुर्ख़ियों में है और विपक्षी दल भी इस पर लगातार तंज कस रहे हैं। पिछले कई महीनों से मंत्री विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से नाखुश हैं और कई बार खुले मंच से उन्हें चेतावनी दे चुके हैं। इसी के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या मंत्री की झुंझलाहट उनकी कमजोरी की ओर इशारा कर रही है।

क्या है ताजा मामला

सबसे नया प्रकरण बिजली बिल महंगा किए जाने से जुड़ा है। ऊर्जा मंत्री ने UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जताई है और साथ ही संविदा कर्मियों की छंटनी पर भी सवाल खड़े किए हैं। मंत्री के इस पत्र को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारियों पर बार-बार खुलकर नाराजगी जताने और तीखी टिप्पणियों के चलते यह सवाल उठने लगा है कि यह सख्त प्रशासनिक रुख है या फिर बढ़ते बिजली संकट और आंतरिक दबाव के बीच उभरती कमजोरी।

अधिकारियों पर सीधा हमला

हाल ही में मंत्री ने अपने ही विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के कुछ अधिकारी उन्हें बदनाम करने की साजिश में जुटे हैं। एक वायरल वीडियो में शर्मा ने कहा कि जनता गालियां दे रही है, लेकिन अधिकारी ‘अंधे-बहरे’ बने बैठे हैं। गलत बिलिंग, लटके तारों और लापरवाही को लेकर उन्होंने सस्पेंशन तक की चेतावनी दे डाली।

समर्थकों की राय

मंत्री के समर्थक इसे सकारात्मक बयान बता रहे हैं। उनका तर्क है कि शर्मा बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्ती से काम कर रहे हैं और लापरवाह अधिकारियों को नहीं बख्श रहे। गंभीर बिजली कटौती और गर्मी के मौसम में बढ़ी मांग के बीच उन्होंने पूरे विभाग को अलर्ट मोड में रखा हुआ है।

विपक्ष और आलोचकों का नजरिया

दूसरी ओर विपक्षी दलों और कुछ अधिकारियों के करीबियों का आरोप है कि बार-बार सार्वजनिक रूप से गुस्सा दिखाना मंत्री की मजबूती नहीं, बल्कि नियंत्रण खोने की निशानी है। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने बिजली संकट को लेकर सरकार को घेरा है, जिसके जवाब में मंत्री शर्मा का तेवर और भी आक्रामक तथा तीखा होता जा रहा है।

चेयरमैन से टकराव

बुधवार को ही बिजली दरों में बढ़ोतरी जैसे फैसलों पर मंत्री ने अपने ही विभाग के प्रमुख को पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्हें इसकी सूचना तक क्यों नहीं दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व आईएएस अधिकारी रहे एके शर्मा प्रशासनिक सख्ती के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन राजनीतिक पद पर बार-बार वायरल होते गुस्से के एपिसोड उनकी छवि को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ का यह भी कहना है कि विभागीय अड़चनों के कारण वे हताशा महसूस कर रहे हैं।

मंत्री कार्यालय की चुप्पी

मंत्री के कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक शर्मा बिजली सुधार परियोजनाओं को तेज करने पर जोर दे रहे हैं। प्रदेश में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती बड़ी है। अब देखना यह होगा कि मंत्री का यह आक्रामक अंदाज सुधार लाता है या विवादों को और बढ़ाता है। फिलहाल जनता राहत की उम्मीद लगाए बैठी है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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