डिजिटल स्वास्थ्य का नया दौर: आभा खातों की संख्या 90 करोड़ के पार, यूपी सबसे आगे उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत देशभर में बने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) की संख्या 90 करोड़ के पार पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ से अधिक खातों के साथ देश में पहले स्थान पर है।

देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की ओर से लागू किए गए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत देशभर में बनाए गए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) की संख्या 90 करोड़ के अहम पड़ाव को पार कर चुकी है। सरकार ने इसकी जानकारी शनिवार को दी। यह कदम भारत को आपस में जुड़ी, परस्पर संचालित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने वाली यात्रा का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।

किस राज्य में कितने आभा खाते

आभा खाते बनाने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 15.3 करोड़ से अधिक खाते बनाए जा चुके हैं। इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र में प्रत्येक राज्य में 7.1 करोड़ खाते बने हैं, जबकि बिहार में 6.3 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 5.9 करोड़ खाते दर्ज किए गए हैं।

मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पूरे देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है।

हर साल बढ़ता गया आंकड़ा

एबीडीएम की शुरुआत के बाद से ही आभा खाते बनाने की रफ्तार में निरंतर इजाफा देखा गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कैलेंडर वर्ष के हिसाब से कुल आभा खातों की संख्या 2021 में 14.7 करोड़ थी, जो 2022 में बढ़कर 30.4 करोड़ हो गई।

इसके बाद यह संख्या 2023 में 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ तक पहुंच गई। वर्ष 2026 में आभा ने 90 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।

एनएचए सीईओ ने क्या कहा

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्णवाल ने कहा कि 90 करोड़ से अधिक आभा खातों का बनना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में नागरिकों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और इकोसिस्टम से जुड़े साझेदारों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आभा नागरिकों को उनकी स्वास्थ्य जानकारी तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच देकर सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे एबीडीएम को अपनाने का दायरा बढ़ेगा, आभा इलाज की निरंतरता को संभव बनाएगा, कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करेगा और एक अधिक सरल, पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था को बढ़ावा देगा।

इन केंद्र शासित प्रदेशों ने पूरा किया लक्ष्य

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख, लक्षद्वीप तथा दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव ने अपना लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया है।

आधे खाते महिलाओं के नाम

बनाए गए कुल आभा खातों में से करीब आधे महिलाओं के हैं, जो कुल आभा धारकों का 49.75 प्रतिशत हैं। यह आंकड़ा खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुंच देकर सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ पहले संपर्क बिंदु से ही आभा इलाज की निरंतरता बनाए रखने में मदद कर सकता है, जिसमें मां और बच्चे की देखभाल, टीकाकरण और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।

कैसे काम आता है आभा

नागरिकों के लिए आभा अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों और एप्लिकेशन में मौजूद उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने में सहायक होता है। इससे उन्हें अपने मेडिकल दस्तावेज हर जगह साथ ले जाने की जरूरत कम पड़ती है। जरूरत पड़ने पर और अपनी सहमति के आधार पर वे अपनी स्वास्थ्य जानकारी सुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ साझा कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!