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एक घंटा पहले
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मैदान पर ईमानदारी की नई नजीर
कैलिफोर्निया में आयोजित हो रहे यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय बैडमिंटन जगत के दिग्गज और पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने न केवल खेल में बल्कि मानवीय संवेदनाओं के मामले में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है। टूर्नामेंट के सेमीफाइनल मुकाबले में जापान के युदाई ओकिमोतो के खिलाफ खेलते हुए श्रीकांत ने जीत और खेल भावना का ऐसा तालमेल दिखाया, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। 72 मिनट तक चले इस कड़े और रोमांचक मुकाबले में श्रीकांत ने जीत दर्ज कर फाइनल का सफर तय किया है।
फाइनल का रोमांच और प्रतिद्वंद्वी
यूएस ओपन सुपर 300 मेंस सिंगल्स के इस अहम पड़ाव पर 33 साल के किदांबी श्रीकांत ने जापान के खिलाड़ी को मात देकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना चीनी ताइपे के खिलाड़ी सू ली यांग से होगा। खेल प्रेमी इस मुकाबले को लेकर काफी उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय स्टार अपना शानदार फॉर्म जारी रखेंगे।
मैच के दौरान क्या हुआ था?
घटना उस समय की है जब मैच अपने निर्णायक तीसरे गेम में था और मुकाबला बेहद कांटे का चल रहा था। खेल के उस नाजुक मोड़ पर श्रीकांत के एक शॉट पर लाइन जज ने निर्णय भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में दिया। हालांकि, रीप्ले में स्पष्ट था कि शटल लाइन के बाहर गिरी थी। जापानी शटलर युदाई ओकिमोतो फैसले से काफी निराश थे और उन्होंने चेयर अंपायर के साथ-साथ टूर्नामेंट रेफरी से भी अपनी आपत्ति जताई, लेकिन नियमों की सीमाओं के कारण फैसला बदलना संभव नहीं लग रहा था।
खेल भावना से जीता सबका दिल
ऐसे में जब हर एक अंक का महत्व काफी बढ़ गया था, श्रीकांत ने आगे बढ़कर मिसाल पेश की। उन्होंने खुद अंपायर के पास जाकर यह स्वीकार किया कि शटल बाहर थी। श्रीकांत की इस ईमानदारी को देखकर अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया और वह महत्वपूर्ण अंक जापानी खिलाड़ी को दे दिया गया। इस खेल भावना को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक भावुक हो गए और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सोशल मीडिया पर भी खेल प्रेमियों द्वारा श्रीकांत के इस व्यवहार की जमकर सराहना की जा रही है और उन्हें खेल का सच्चा राजदूत बताया जा रहा है।
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