गंगा एक्सप्रेसवे बना विकास की रीढ़, 12 जिलों की बदलेगी तस्वीर; जमीनों का सर्वे शुरू उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 29
उत्तर प्रदेश सरकार ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर टाउनशिप, औद्योगिक कॉरिडोर और कमर्शियल हब विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार किया है, जिससे 12 जिलों को नई दिशा मिलेगी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को महज एक सड़क मार्ग तक सीमित न रखते हुए इसे प्रदेश के आर्थिक विकास की धुरी बनाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार किया गया है, जिसका असर रास्ते में पड़ने वाले 12 जिलों की किस्मत पर पड़ेगा।

सिर्फ कॉरिडोर नहीं, समग्र विकास का खाका

मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक पहुंचने वाला यह एक्सप्रेसवे अब केवल तेज रफ्तार आवागमन का जरिया भर नहीं रहेगा। योजना के तहत इसके दोनों किनारों पर आधुनिक टाउनशिप, विशाल औद्योगिक कॉरिडोर और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे पूरे क्षेत्र की सूरत बदल जाएगी।

जमीनों का सर्वे शुरू

परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए यूपीडा (UPEIDA) और संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने भूमि का सर्वेक्षण आरंभ कर दिया है। इस कवायद के जरिए विकास के लिए आवश्यक जमीनों को चिह्नित किया जा रहा है।

निवेश और रोजगार की संभावनाएं

सरकार का अनुमान है कि इस पहल से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। साथ ही लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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