राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत की मारक क्षमता में एक बड़ा इजाफा हुआ है। ओडिशा के चांदीपुर तट पर जब समंदर की लहरें शांत थीं, तभी एक जोरदार धमाके के साथ एक सफेद रंग की स्वदेशी मिसाइल आग उगलते हुए आसमान को चीरकर आगे बढ़ गई। यह कोई साधारण मिसाइल नहीं, बल्कि वह हथियार है जो आने वाले समय में युद्ध के तौर-तरीकों को बदल सकता है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की अपनी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया है, जिसे भारत की टॉमहॉक भी कहा जा रहा है। इस सफलता ने पड़ोसी देशों के रक्षा हलकों की चिंता बढ़ा दी है।
जहां भारत की सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस अपनी तूफानी रफ्तार के लिए जानी जाती है, वहीं यह नई LRLACM रफ्तार के लिहाज से शांत यानी सबसोनिक है। लेकिन इसकी असली ताकत इसकी रफ्तार में नहीं, बल्कि उस अदृश्य पहुंच में है, जो ब्रह्मोस से तीन गुना ज्यादा दूरी तक दुश्मन के लिए खतरा बन सकती है। भारत के अपने स्वदेशी माणिक टर्बोफैन इंजन से लैस यह क्रूज मिसाइल समंदर की सतह को छूते हुए और पहाड़ों की ओट में छिपते हुए दुश्मन के इलाके में 1,500 किलोमीटर भीतर तक घुसकर हमला करने में सक्षम है।
यह निर्भय और ITCM मिसाइल कार्यक्रम की परिपक्व तकनीकों पर आधारित एक अत्याधुनिक, पूरी तरह स्वदेशी क्रूज मिसाइल है, जो भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
मुख्य विशेषताएं और तकनीकी फीचर्स
- लो-अल्टीट्यूड और सी-स्किमिंग: यह मिसाइल जमीन से सटकर पहाड़ों और घाटियों के बीच से राडार की नजरों से बचते हुए उड़ान भर सकती है। समुद्र के ऊपर यह पानी की सतह के बेहद करीब उड़ने में सक्षम है।
- वेपॉइंट नेविगेशन: यह सीधे रास्ते के बजाय टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर गुजरती है, जिससे दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम इसके अंतिम टारगेट का अंदाजा नहीं लगा पाते।
- स्वदेशी इंजन: इसे ताकत भारत के अपने ‘माणिक’ स्मॉल टर्बोफैन इंजन (Manik STFE) से मिलती है। इससे पहले भारत इस श्रेणी के इंजनों के लिए रूस पर निर्भर रहता था।
- लॉन्च प्लेटफॉर्म्स: इसे जमीन पर चलने वाले मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर और नौसेना के युद्धपोतों में लगे यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल (UVLM) दोनों से दागा जा सकता है। सुखोई-30 MKI से लॉन्च होने वाला इसका एयर-लॉन्च वेरिएंट भी विकसित किया जा रहा है।
पेलोड, रेंज और अनुमानित कीमत
- रेंज: इस मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर से लेकर 1,500 किलोमीटर तक है, यानी यह दुश्मन के इलाके में काफी गहराई तक घुसकर हमला कर सकती है।
- पेलोड: यह करीब 200 से 300 किलोग्राम वजनी पारंपरिक और विशेष विस्फोटक ले जाने में सक्षम है। इसके अग्रभाग में आधुनिक सीकर लगे हैं, जो आखिरी पलों में सटीक टारगेट की पहचान करते हैं।
- रफ्तार: यह एक सबसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो करीब 0.7 से 0.8 मैक (लगभग 850-950 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ती है। कम रफ्तार इसे चुपके से आगे बढ़ने में मदद करती है।
- वजन और लंबाई: इसकी लंबाई करीब 6 मीटर और वजन करीब 1 टन (1,000 किलोग्राम) है।
- कीमत: आधिकारिक तौर पर सटीक कीमत का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल (जिसकी कीमत करीब $1.5-$2 मिलियन डॉलर होती है) की तुलना में स्वदेशी LRLACM की निर्माण लागत काफी कम (अनुमानित 5 से 7 करोड़ रुपये प्रति मिसाइल) बैठने वाली है, क्योंकि इसके सभी सब-सिस्टम भारत में ही बने हैं।
वैश्विक मिसाइलों से तुलना
भारत की LRLACM एक सबसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 1,000 से 1,500 किमी और रफ्तार 0.7 से 0.8 मैक है। इसकी मुख्य भूमिका डीप पेनिट्रेशन और लैंड अटैक की है।
अमेरिका की टॉमहॉक भी सबसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 1,600 से 2,500 किमी और रफ्तार 0.74 मैक है। यह ग्लोबल स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक के काम आती है।
रूस की कैलिबर सबसोनिक/सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 1,500 से 2,500 किमी और रफ्तार 0.8 मैक (टर्मिनल 3 मैक) है। यह लंबी दूरी के हमले के लिए इस्तेमाल होती है।
वहीं भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी रेंज 290 से 500 किमी और रफ्तार 2.8 से 3.0 मैक है। यह क्विक, हाई-स्पीड प्रिसिजन स्ट्राइक में माहिर है।
भारतीय सेनाओं के लिए कितनी बड़ी कामयाबी?
- ब्रह्मोस और LRLACM की जुगलबंदी: ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के एयर डिफेंस को तुरंत तबाह करने के काम आएगी, जबकि LRLACM अपनी लंबी दूरी और जमीन से सटकर उड़ने की खूबी के कारण दुश्मन के अंदरूनी कमांड सेंटर्स, एयरबेस, रसद डिपो और राडार स्टेशनों को निशाना बनाएगी।
- पूरी तरह आत्मनिर्भर: एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने इसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ मिलकर तैयार किया है। युद्ध की स्थिति में विदेशी पाबंदियों का इसकी सप्लाई चेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- कॉस्ट-इफेक्टिव वॉरफेयर: सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक मिसाइलें बेहद महंगी होती हैं। लंबी दूरी के युद्ध में जहां सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें दागनी पड़ती हैं, वहां LRLACM जैसी सबसोनिक मिसाइलें किफायती और बेहद विनाशकारी हथियार साबित होती हैं।
क्या LRLACM परमाणु सक्षम मिसाइल है?
LRLACM को मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना, वायुसेना) के लिए एक पारंपरिक लंबी दूरी के सटीक-स्ट्राइक हथियार के रूप में तैयार किया जा रहा है। तकनीकी रूप से क्रूज मिसाइलों को जरूरत पड़ने पर रणनीतिक पेलोड के लिए मॉडिफाई किया जा सकता है, लेकिन इसका मुख्य फोकस पारंपरिक युद्ध पर ही है।
निर्भय मिसाइल से किस तरह अलग है?
निर्भय मिसाइल एक टेक्नोलॉजी डेमोनस्ट्रेटर थी, जिसमें शुरुआती चरणों में रूसी इंजन का इस्तेमाल हुआ था। LRLACM उसी तकनीक का बेहद एडवांस, रिफाइंड और 100% स्वदेशी वेरिएंट है, जिसमें उन्नत एवियोनिक्स, आधुनिक सीकर और पूरी तरह भारत में निर्मित ‘माणिक’ टर्बोफैन इंजन का उपयोग किया गया है।
सबसोनिक होने के बावजूद इसे रोकना मुश्किल क्यों?
भले ही इसकी रफ्तार ध्वनि से कम हो, लेकिन इसकी ताकत इसकी ‘अदृश्यता’ में है। यह जमीन या समुद्र की सतह से महज कुछ मीटर ऊपर उड़ती है। इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान के कारण पृथ्वी की वक्रता और पहाड़ों की ओट की वजह से दुश्मन के बड़े राडार इसे तब तक नहीं देख पाते, जब तक यह बेहद करीब न आ जाए।
नौसेना के लिए क्यों है खास?
नौसेना इसके जरिए अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों से दुश्मन की मुख्य भूमि पर 1,500 किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों को तबाह कर सकेगी। इससे भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र से ‘स्टैंड-ऑफ लैंड अटैक’ यानी दुश्मन की मिसाइल रेंज से बाहर रहकर जमीन पर हमला करने की बेहतरीन क्षमता मिल जाएगी।
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