मानसून सत्र से पहले एक्शन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, टीएमसी और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों पर लेंगे अंतिम फैसला भारत 2 महीने पहले 81
संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग पर बड़ा फैसला ले सकते हैं।

संसद का आगामी मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस सत्र के शुरू होने से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में हुई बगावत से जुड़े मामलों पर अपना अंतिम और बड़ा फैसला सुनाने की तैयारी में हैं। दोनों ही विपक्षी दलों ने अपने-अपने बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत लोकसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि संसद का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाला है।

लोकसभा अध्यक्ष ने शुरू की विशेषज्ञों के साथ कानूनी समीक्षा

संसद सचिवालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है। उन्होंने हाल ही में TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल और पार्टी से अलग हुए बागी गुट के नेताओं से मुलाकात कर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं। इसी तरह की प्रक्रिया शिवसेना (UBT) के मामले में भी अपनाई गई है, जहां दोनों गुटों के पक्ष को ध्यानपूर्वक सुना गया है।

इस पूरे मामले में कोई भी कानूनी कमी न रहे, इसलिए लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय संसद के विधि और संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ लगातार गहन विचार-विमर्श कर रहा है। विशेषज्ञों की टीम इसी तरह के पिछले मामलों में विभिन्न पीठासीन अधिकारियों (स्पीकर्स) द्वारा लिए गए फैसलों और पुरानी नजीरों का बहुत बारीकी से अध्ययन कर रही है। इन तमाम कानूनी पहलुओं और विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर ही अध्यक्ष ओम बिरला 20 जुलाई से पहले अपना अंतिम निर्णय सुनाएंगे।

टीएमसी के 20 सांसदों ने बगावत कर थामा नया दामन

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर कुल 29 सांसद निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे। हालांकि, पार्टी के भीतर आए इस बड़े राजनीतिक भूचाल के तहत इन निर्वाचित सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। इन बागी सांसदों ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पंजीकृत, लेकिन एक गैर-मान्यता प्राप्त दल 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) की सदस्यता ग्रहण कर ली है और लोकसभा में अपने बैठने के लिए अलग से व्यवस्था करने की मांग की है। इस बागी गुट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति अपना समर्थन जताते हुए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद का कुछ समय पहले असामयिक निधन हो गया था, जिसके चलते फिलहाल वह सीट रिक्त पड़ी है।

शिवसेना (UBT) के 6 सांसद भी शिंदे गुट में हुए शामिल

महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े इस मामले में शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुनकर आए कुल 9 सांसदों में से 6 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है। इन छह सांसदों ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की है।

तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) दोनों ही मूल दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष यह मजबूत दलील दी है कि उनके बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत तुरंत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। दोनों पार्टियों का स्पष्ट कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से छूट केवल उसी परिस्थिति में मिल सकती है, जब मूल पार्टी के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होकर कोई निर्णय लें।

इन सब के बीच, दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने लोकसभा अध्यक्ष से कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है। दरअसल, तमिलनाडु में दशकों पुराने गठबंधन को तोड़ते हुए कांग्रेस ने वहां के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की नवनिर्मित पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ हाथ मिला लिया है, जिसके बाद डीएमके ने यह कदम उठाया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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