इंडियम पर चीन की घेराबंदी, क्या भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए बढ़ेगी मुश्किल? व्यापार 2 घंटे पहले 3
चीन ने इंडियम के निर्यात पर पाबंदियां बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप निर्माण पर पड़ रहा है। इस कदम से सेमीकंडक्टर बाजार में कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

चीन का बड़ा दांव

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड ऑप्टिकल चिप्स के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाली दुर्लभ धातु इंडियम को लेकर चीन ने सख्त रुख अपना लिया है। चीन वैश्विक स्तर पर इंडियम के कुल उत्पादन का 70 फीसदी हिस्सा नियंत्रित करता है। अब ड्रैगन ने इसके निर्यात पर कड़ी शर्तें लागू कर दी हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ना तय है।

कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

चीन द्वारा निर्यात के लिए एंड-यूजर की अनिवार्य और कठोर जांच शुरू करने के बाद बाजार में कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसका असर 6-इंच इंडियम फॉस्फाइड वेफर्स की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी कीमत 250 फीसदी तक बढ़ गई है। पहले जो वेफर $1400 में मिल रहे थे, उनकी कीमत अब उछलकर $5000 प्रति वेफर तक पहुंच गई है।

भारत के चिप मिशन पर क्या होगा असर

चीन के इस कदम को एक तरह के व्यावहारिक प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है। भारत का सेमीकंडक्टर मिशन और टाटा-फॉक्सकॉन जैसे बड़े संस्थानों द्वारा शुरू किए जा रहे अरबों रुपये के अपकमिंग चिप प्लांट्स के लिए यह एक नई चुनौती पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई बाधा के चलते आने वाले समय में निर्माण लागत में बढ़ोतरी होना और सप्लाई चेन में देरी होना लगभग तय है।

इंडियम की उपयोगिता

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का आधार।
  • हाई-स्पीड ऑप्टिकल चिप्स और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में अनिवार्य।
  • सेमीकंडक्टर निर्माण उद्योग की रीढ़।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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