115 करोड़ की कंपनी और 100 से ज्यादा कर्मचारी, फिर भी अमेरिका ने भारतीय कारोबारी को नहीं दिया वीजा व्यापार एक महीने पहले 15
अमेरिकी अधिकारियों ने एक भारतीय उद्यमी का वीजा यह कहकर खारिज कर दिया कि उनका अपने देश से पर्याप्त संबंध नहीं है, जबकि उद्यमी भारत में पैदा हुए, यहीं पढ़े और 115 करोड़ रुपये सालाना रेवेन्यू वाली कंपनी चलाते हैं। सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।

अमेरिका के सख्त होते वीजा नियमों का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों ने एक भारतीय उद्यमी का वीजा आवेदन यह तर्क देते हुए ठुकरा दिया कि उनका अपने ही देश यानी भारत के साथ पर्याप्त संबंध नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि संबंधित उद्यमी का जन्म भारत में हुआ, पढ़ाई-लिखाई यहीं हुई और वे यहां एक बड़ी कंपनी भी चला रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोग काम करते हैं।

किसका और क्यों खारिज हुआ वीजा

बैम्बो किड्सवियर ब्रांड किडबी (Kidbea) के फाउंडर स्वपनिल श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी अधिकारियों ने उनका वीजा केवल इस आधार पर अस्वीकार कर दिया कि भारत के साथ उनका पर्याप्त जुड़ाव नहीं है।

स्वपनिल के मुताबिक वे साल 2021 से अपनी कंपनी चला रहे हैं, जिसका सालाना रेवेन्यू 1.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 115 करोड़ रुपये है। उनकी कंपनी में 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि वे भारत में जन्मे, यहीं से अपनी शिक्षा पूरी की और उनकी कंपनी को टॉप-टीयर वेंचर कैपिटल का समर्थन भी हासिल है। इसके बावजूद अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि उनका अपने देश से जुड़ाव कमजोर है।

उद्यमी का सवाल

स्वपनिल श्रीवास्तव ने अपनी पोस्ट में हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर एक वीजा आवेदन में अमेरिकी अधिकारी और क्या देखना चाहते हैं। उन्होंने लिखा कि वे भारत में पैदा हुए, यहां उनका परिवार है, सांस्कृतिक जड़ें हैं और 100 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी भी है। इसके बाद भी उनका भारत से संबंध पर्याप्त क्यों नहीं माना जा रहा।

उन्होंने आगे कहा कि उनकी कंपनी अपने ब्रांड के जरिए लाखों भारतीय परिवारों तक सेवाएं पहुंचा रही है, फिर भी अपने ही देश के साथ उनका संबंध अधूरा कैसे माना जा सकता है। स्वपनिल ने उन अन्य लोगों से भी अपने अनुभव साझा करने को कहा, जिनके आवेदन ऐसे ही कारणों से खारिज हुए हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

स्वपनिल की पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए और दोबारा आवेदन करने से पहले कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी।

एक यूजर ने लिखा कि उसे 5 बार रिजेक्शन झेलना पड़ा और आखिरकार उसके पासपोर्ट पर अमेरिकी वीजा लग ही गया। उसने बताया कि उसके एक मित्र ने O1 वीजा पर अमेरिका में 4 साल बिताए, लेकिन लौटने के बाद उसे दोबारा वीजा हासिल करने में काफी कठिनाई हुई।

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि सबसे पहले अमेरिका में होने वाले किसी आयोजन के लिए टिकट बुक करनी चाहिए और उसमें शामिल होने के लिए पासपोर्ट पर अनुमति लेनी चाहिए। उसके मुताबिक यह तरीका कई तरह के सवालों से बचा सकता है और अगली बार आवेदन आसानी से स्वीकार होने की संभावना बढ़ जाती है।

सख्त होते अमेरिकी वीजा नियम

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने पिछले कुछ समय से अपने वीजा नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। खासकर एच1बी वीजा देने में अब बहुत अधिक सतर्कता बरती जा रही है।

नए नियमों के तहत भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखने वाली कंपनियों को 1 लाख डॉलर तक की फीस चुकानी पड़ती है। इसका मकसद अमेरिकी कंपनियों में स्थानीय प्रोफेशनल्स को अधिक से अधिक अवसर देना बताया जा रहा है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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