8वां वेतन आयोग: देरी बनी कमाई का जरिया? कर्मचारियों को मिल सकता है ₹14 लाख तक एरियर! व्यापार एक महीने पहले 18
8वें वेतन आयोग के लागू होने में हो रही देरी कर्मचारियों के लिए बड़े वित्तीय लाभ का रास्ता खोल सकती है, क्योंकि देर से मिलने वाला एकमुश्त एरियर लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय पूरी तरह 8वें वेतन आयोग पर लगी हुई हैं। आयोग को लेकर कर्मचारियों के बीच उत्सुकता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा इन्हीं सवालों की है कि आयोग की सिफारिशें आखिर कब सामने आएंगी, नया फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में कितनी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

एरियर को लेकर बड़े दावे

इन्हीं चर्चाओं के बीच एरियर को लेकर भी जोरदार दावे किए जा रहे हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक, यदि आयोग को लागू करने में देरी होती है तो कर्मचारियों को एकमुश्त लाखों रुपये का एरियर मिल सकता है। यही वह समीकरण है जिसकी वजह से वेतन आयोग में होने वाली देरी कर्मचारियों के लिए फायदे का सौदा बनती दिख रही है।

सुझाव देने की समयसीमा

वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह 15 जून तक कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों के सुझावों को स्वीकार करेगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि सुझाव देने की यह समयसीमा अब आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

फिटमेंट फैक्टर 3.68 की मांग

कर्मचारी संगठनों की ओर से इस दौरान कई तरह की मांगें रखी गई हैं। इनमें एक बड़ी मांग यह है कि फिटमेंट फैक्टर को 3.68 कर दिया जाए। इसी फैक्टर के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाएगी। अगर 8वां वेतन आयोग इस सिफारिश को मान लेता है, तो नया वेतन लागू होने में हो रही देरी कर्मचारियों के लिए जैकपॉट साबित हो सकती है।

दावों के साथ जुड़ी हैं कई शर्तें

हालांकि, इन दावों के पीछे कई अहम शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। एरियर की संभावित रकम पूरी तरह फिटमेंट फैक्टर, आयोग के लागू होने की तारीख और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। यही कारण है कि अभी पेश किए जा रहे बड़े आंकड़ों को अंतिम सच मान लेना जल्दबाजी होगी।

इसके बावजूद, वेतन आयोग में देरी का यह समीकरण कर्मचारियों के लिए एक बड़े वित्तीय लाभ की संभावना जरूर पैदा कर रहा है, और इसी वजह से कर्मचारी हर अपडेट पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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