भीषण गर्मी में वन्यजीवों के बीच जंगल सफारी का रोमांच, यूपी का दुधवा नेशनल पार्क है सबसे बेहतरीन विकल्प उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
लखीमपुर खीरी में स्थित दुधवा नेशनल पार्क गर्मियों में पर्यटकों को जंगल सफारी, घनी हरियाली और दुर्लभ वन्यजीवों का अनुभव कराता है। सैलानी 15 जून तक यहां वन्यजीवों का दीदार कर सकते हैं, इसके बाद यह पार्क बंद हो जाता है।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बसा दुधवा नेशनल पार्क इन दिनों गर्मी के मौसम में पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। तपती धूप और भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी तादाद में लोग दुधवा के घने जंगलों की ओर पहुंच रहे हैं। यहां की हरियाली, ठंडी हवा, रोमांचक जंगल सफारी और दुर्लभ वन्यजीव सैलानियों को प्रकृति के बेहद करीब ले आते हैं। जहां गर्मियों में शहरों का तापमान लोगों को बेहाल कर देता है, वहीं दुधवा का प्राकृतिक वातावरण सुकून और रोमांच दोनों का एहसास कराता है।

देश के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों में शुमार

नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में फैला दुधवा नेशनल पार्क देश के अग्रणी राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है। जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए इस पार्क की पहचान दुनियाभर में अलग है। गर्मियों में यहां पहुंचने वाले पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठाते हुए बाघ, हिरण, हाथी, गैंडा और बारहसिंगा समेत कई दुर्लभ जीवों को बेहद नजदीक से निहारते हैं।

490 वर्ग किलोमीटर में फैला है पार्क

दुधवा नेशनल पार्क करीब 490 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और यह दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, जिसमें किशनपुर वन्यजीव विहार और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार भी शामिल हैं। यहां के घने साल के जंगल, घास के विशाल मैदान, दलदली इलाके और शांत माहौल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। गर्मी के मौसम में सुबह और शाम के समय जंगल का नजारा बेहद मनमोहक होता है। सूर्योदय के समय पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवा अलग ही अनुभव देती है, जबकि शाम ढलते ही जंगल के रास्तों पर विचरते वन्यजीव सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

गर्मी क्यों है वन्यजीव देखने का सबसे अच्छा समय

देश-विदेश से सैलानी वन्यजीवों को देखने के लिए दुधवा पहुंच रहे हैं। यह पार्क बाघों की चहलकदमी के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। गर्मी का मौसम वन्यजीवों को देखने के लिहाज से सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि तेज गर्मी में जानवर पानी की तलाश में जलाशयों और खुले इलाकों में ज्यादा नजर आते हैं। ऐसे में सफारी के दौरान पर्यटकों को बाघ, हिरण, जंगली हाथी, नीलगाय, बारहसिंगा और अन्य वन्यजीवों को देखने के अधिक अवसर मिलते हैं।

जिप्सी से कराई जाती है जंगल सफारी

वन विभाग की ओर से पर्यटकों के लिए जिप्सी के जरिए जंगल सफारी की सुविधा दी गई है। सुबह और शाम दोनों समय सफारी कराई जाती है, जिसमें सैलानी जंगल के भीतर जाकर प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को नजदीक से देख सकते हैं। कई बार सफारी के दौरान बाघ को सड़क पार करते देखना पर्यटकों के रोमांच को और बढ़ा देता है। इसके अलावा हाथियों के झुंड, चीतल, सांभर, जंगली सूअर और रंग-बिरंगे पक्षी जंगल की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

450 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा

दुधवा नेशनल पार्क सिर्फ वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों के लिए भी बेहद खास है। यहां करीब 450 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं और गर्मी के मौसम में भी कई दुर्लभ पक्षी नजर आते हैं। मोर, हॉर्नबिल, कठफोड़वा, उल्लू, सारस, बाज और जलपक्षियों की विभिन्न प्रजातियां पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। पक्षी प्रेमी सुबह के समय दूरबीन और कैमरे लेकर जंगल पहुंचते हैं और खूबसूरत पक्षियों की तस्वीरें कैद करते हैं।

परिवार के साथ घूमने का शानदार ठिकाना

गर्मी की छुट्टियों में दुधवा नेशनल पार्क परिवार के साथ घूमने के लिए बेहतरीन जगह मानी जाती है। यहां बच्चे प्रकृति और वन्यजीवों के बारे में नई जानकारी हासिल कर सकते हैं। जंगल सफारी बच्चों के लिए बेहद रोमांचक अनुभव साबित होती है और परिवार के साथ यहां बिताया गया समय यादगार बन जाता है। शहरों की भीड़भाड़ और प्रदूषण से दूर दुधवा का वातावरण लोगों को प्राकृतिक जीवन का एहसास कराता है।

15 जून तक ही मिलेगा वन्यजीवों का दीदार

अगर आप भी दुधवा के जंगलों में वन्यजीवों को देखना चाहते हैं तो 15 जून तक यहां पहुंच सकते हैं, क्योंकि इसके बाद दुधवा नेशनल पार्क सैलानियों के लिए बंद कर दिया जाता है और फिर वन्यजीवन का नजारा नहीं देखा जा सकेगा। यह पार्क नवंबर के महीने में पर्यटकों के लिए खोला जाता है और जून में दोबारा बंद कर दिया जाता है। ऐसे में आप लखनऊ और दिल्ली से सीधे दुधवा नेशनल पार्क तक पहुंच सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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