राजस्थान
एक घंटा पहले
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कोटा के बहुचर्चित चन्द्रसेल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जांच में सामने आया है कि यह हत्या मठ की 750 बीघा जमीन और 4.33 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस को हथियाने की मंशा से की गई थी। पुलिस ने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता समेत उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार इस पूरे हत्याकांड में मोटे तौर पर पांच लोगों की भूमिका मानी जा रही है। मामले की एक-एक कड़ी जोड़ते हुए पुलिस अन्य आरोपियों तक पहुंचने में जुटी है।
कौन है हत्या का मास्टरमाइंड
कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड संतोष राय है। वह मठ ट्रस्ट का कथित अध्यक्ष है और पेशे से वकील है। उसकी नजर मठ की 750 बीघा जमीन और 4.33 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस पर थी और वह इस पूरी संपत्ति को अपने कब्जे में लेना चाहता था।
इस राह में देवानंद महाराज उसके लिए सबसे बड़ी रुकावट बने हुए थे। महंत को रास्ते से हटाने के लिए संतोष राय ने अपने पुराने परिचित आदित्य वर्मा को 1 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की योजना तैयार की।
दो बाइक पर पहुंचे चार किलर्स
सुपारी मिलने के बाद आदित्य ने अपने आदमियों से देवानंद महाराज की रेकी करवाई। इसके बाद वारदात को अंजाम देने के लिए 5 जून की रात चार किलर्स दो बाइक पर सवार होकर मठ पहुंचे। इनमें एक नाबालिग भी शामिल था। हमलावरों ने देवानंद महाराज की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए।
अगले दिन जब महंत का खून से लथपथ शव मिला तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मठ से जुड़े लोग आक्रोशित हो उठे और बिगड़ते माहौल को देखते हुए वहां भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
घटनास्थल के हालात और शुरुआती जांच से ही पुलिस को आशंका हो गई थी कि हत्या के पीछे मठ की संपत्ति का विवाद है। लिहाजा जांच इसी एंगल से आगे बढ़ाई गई। इस बीच पुलिस को भटकाने के लिए संतोष राय वारदात से पहले ही पैर की सर्जरी का बहाना बनाकर जयपुर के अस्पताल में भर्ती हो गया।
हालांकि पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने एक-एक कड़ी जोड़कर आरोपियों की पहचान कर ली। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय के साथ उसके सहयोगी पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
जांच के लिए बनाई गई एसआईटी
एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। साइबर सेल और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संतोष कुमार राय और पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया।
पुलिस को आशंका है कि इस वारदात में आरोपी आदित्य वर्मा की पत्नी का भी हाथ हो सकता है, जिसने आरोपियों की मदद की थी। फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी खंगालने में जुटी है और आगे की जांच में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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