कोटा का बांके बिहारी मंदिर: जहां भक्त की भक्ति में बंध जाते हैं ठाकुर जी, इसलिए रुक-रुक कर होते हैं दर्शन राजस्थान एक घंटा पहले 2
कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में बना वृंदावन धाम का बांके बिहारी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां वृंदावन जैसी परंपराओं के साथ दर्शन के बीच-बीच में पर्दा लगाया जाता है।

कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित वृंदावन धाम का बांके बिहारी मंदिर आज श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां ठाकुर जी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में वृंदावन जैसी धार्मिक परंपराओं का निर्वाह किया जाता है।

15 फरवरी 2010 को हुई थी स्थापना

इस मंदिर की स्थापना 15 फरवरी 2010 को हुई थी। तभी से यहां वृंदावन की रीति-रिवाजों के अनुरूप पूजा-अर्चना और सेवा परंपराएं निभाई जा रही हैं। मंदिर में हर एकादशी के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

प्रतिदिन होती हैं चार आरतियां

मंदिर में प्रतिदिन चार आरतियां की जाती हैं, जिनमें शामिल होने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां वृंदावन की अखंड ज्योति के साथ-साथ निधिवन भी मौजूद है, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

गर्मी में लगता है ठंडाई और आमरस का भोग

गर्मी के मौसम में ठाकुर जी को ठंडाई और आमरस का भोग अर्पित किया जाता है। मौसम के अनुरूप भोग और सेवा की यह परंपरा भी वृंदावन की शैली से प्रेरित है।

इसलिए रुक-रुक कर कराए जाते हैं दर्शन

मंदिर में एक विशेष मान्यता प्रचलित है कि यदि कोई भक्त एकटक ठाकुर जी को निहारता रहे तो वे उसकी भक्ति पर मोहित होकर उसके साथ चल देते हैं। इसी मान्यता के चलते दर्शन के दौरान समय-समय पर पर्दा लगाया जाता है, ताकि भक्तों को रुक-रुक कर दर्शन कराए जा सकें।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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