छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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कोरबा जिले के ग्राम नेवसा में गुरुवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब दो युवक पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए गांव की ऊंची पानी टंकी पर जा चढ़े। दोनों का कहना था कि हरदीबाजार थाना प्रभारी ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेकर पीटा और उनसे पैसे भी वसूल लिए। आरोपों के विरोध में वे टंकी के ऊपर डट गए और तब तक उतरने से इनकार करते रहे, जब तक संबंधित थाना प्रभारी पर कार्रवाई का भरोसा नहीं मिल गया।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब यह पता चला कि युवकों के पास पेट्रोल मौजूद है और उन्होंने खुद को आग लगाने की चेतावनी दे डाली। इस धमकी से पूरे गांव में हड़कंप मच गया। लगातार हो रही बारिश के बीच भी दोनों युवक घंटों टंकी पर जमे रहे, जबकि नीचे ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती गई और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, टंकी के ऊपर से दोनों युवक लगातार न्याय की गुहार लगा रहे थे। उनका कहना था कि पुलिस ने उन्हें अपराधी की तरह नहीं, बल्कि जानवरों की तरह पीटा। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि दोनों के खिलाफ जुआ गतिविधियों की शिकायत मिली थी और नियमों के तहत कार्रवाई की गई थी।
युवकों के क्या हैं आरोप
ग्राम नेवसा निवासी रफीक मोहम्मद और दीपेश निर्मलकर का आरोप है कि मंगलवार को पुलिस ने उन्हें सिरली क्षेत्र से पकड़ा और हरदीबाजार थाने ले गई। वहां जुआ संचालन को लेकर उनसे पूछताछ की गई। दोनों का दावा है कि पूछताछ के दौरान उनके साथ मारपीट हुई और बाद में जबरन बयान लिखवाया गया।
युवकों का यह भी आरोप है कि मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाते समय रास्ते में गिरने की कहानी लिखवाई गई, जबकि चोटें उन्हें पुलिस की पिटाई से लगी थीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी।
पैसे वसूलने का भी आरोप
रफीक मोहम्मद का कहना है कि उसके पास मौजूद 23,500 रुपये भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए। इसी आरोप को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखने को मिली। युवकों ने मांग रखी कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
टंकी पर चढ़कर जताया विरोध
गुरुवार सुबह दोनों युवक गांव की पानी टंकी पर चढ़ गए। उनके पास पेट्रोल की बोतल होने की बात भी सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने कई बार खुद को आग लगाने की धमकी दी। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई और तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
चार घंटे चला हाई प्रोफाइल ड्रामा
सूचना मिलते ही तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीएसपी और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। प्रशासन ने ग्रामीणों और परिजनों की मदद से युवकों को समझाने का प्रयास किया। करीब चार घंटे तक चली बातचीत के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद दोनों युवक सुरक्षित नीचे उतर आए।
पुलिस का पक्ष
हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना ने सभी आरोपों को निराधार करार दिया है। उनके अनुसार, दोनों युवक क्षेत्र में जुआ गतिविधियों से जुड़े पाए गए थे और सूचना मिलने पर उन्हें हिरासत में लेकर वैधानिक कार्रवाई की गई थी। थाना प्रभारी ने मारपीट और पैसे लेने के आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया।
फिलहाल इस प्रकरण में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक ओर युवक पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिस सभी आरोपों से इनकार कर रही है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। इस घटना ने पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और ग्रामीण इलाकों में कानून-व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
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