कोडरमा के राजकुमार की प्रेरणादायक कहानी: चेन्नई में करते थे मजदूरी, अब झाड़ू बनाकर कमा रहे हैं लाखों रुपये झारखंड एक महीने पहले 52
झारखंड के कोडरमा निवासी राजकुमार साव ने चेन्नई में सीखी कला को अपना हथियार बनाया और गांव लौटकर एक सफल झाड़ू निर्माण का स्टार्टअप शुरू किया। आज वे अपनी मेहनत से हर महीने 4 से 5 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं।

मेहनत से लिखी सफलता की नई इबारत

अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण झारखंड के कोडरमा जिले के बेकोबार गांव में देखने को मिलता है, जहां राजकुमार साव ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। कभी रोजी-रोटी की तलाश में चेन्नई जाकर मजदूरी करने वाले राजकुमार आज अपने ही इलाके में लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। वे न केवल अपना व्यवसाय चला रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार देने में भी कामयाब रहे हैं।

चेन्नई से सीखी झाड़ू बनाने की कला

राजकुमार साव की यह कहानी संघर्ष और सीखने के जुनून से भरी हुई है। कुछ साल पहले जब उनके पास रोजगार के अवसर कम थे, तो वे काम की तलाश में चेन्नई चले गए। वहां उन्होंने एक कंपनी में लगभग 3 वर्षों तक मजदूरी की। इस दौरान उन्होंने केवल काम नहीं किया, बल्कि झाड़ू बनाने की बारीकियों को भी बहुत करीब से समझा। उन्होंने सीखा कि कैसे विभिन्न गुणवत्ता, वजन और आकर्षक डिजाइनों वाले झाड़ू तैयार किए जाते हैं। चेन्नई में बिताए उन वर्षों में उन्होंने तकनीकी बारीकियां सीखीं और जब उन्हें लगा कि वे अपना खुद का काम शुरू कर सकते हैं, तो उन्होंने वापस अपने गांव लौटने का साहसी निर्णय लिया।

कोडरमा में शुरू किया अपना स्टार्टअप

अपने अनुभव को पूंजी बनाकर राजकुमार ने मई 2026 में कोडरमा के मोरियावां रोड पर अपनी झाड़ू निर्माण इकाई की आधारशिला रखी। शुरुआती दौर में काम का स्तर छोटा था, लेकिन उनकी बनाई हुई झाड़ुओं की गुणवत्ता और उनके आधुनिक डिजाइन को लोगों ने खूब पसंद किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बाजार में बढ़ने लगी और आज उनकी यह फैक्ट्री एक सफल स्टार्टअप के रूप में स्थापित हो चुकी है। राजकुमार की इस यूनिट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ऐसे झाड़ू तैयार किए जा रहे हैं, जो पहले झारखंड के इस इलाके में उपलब्ध नहीं थे।

उत्पादन और बाजार की पहुंच

राजकुमार की फैक्ट्री की कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे प्रतिदिन करीब 300 झाड़ू का उत्पादन कर रहे हैं। एक झाड़ू को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 3 मिनट का समय लगता है। उनके पोर्टफोलियो में कई तरह के मॉडल शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • जेबरा और डबल लॉक
  • स्टील और 5डी स्टील
  • 7 स्टार और हीरो मॉडल
  • चौड़ा पट्टी नारियल झाड़ू
  • साधारण नारियल झाड़ू
  • तीन तार और अन्य छोटे झाड़ू

इनकी कीमत भी ग्राहकों की जेब और जरूरत के अनुसार तय की गई है, जो 24 रुपये से शुरू होकर 57 रुपये तक रहती है। इन उत्पादों की पहुंच सिर्फ कोडरमा के स्थानीय बाजार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों में भी इनके झाड़ुओं की भारी मांग है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल

अपने व्यापार के विस्तार और बढ़ती मांग के कारण, राजकुमार साव की इकाई अब हर महीने 4 से 5 लाख रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर रही है। यह उनकी सफलता का एक बड़ा प्रमाण है कि एक मजदूर से उद्यमी तक का सफर कितना शानदार रहा है। राजकुमार की इस सफलता का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने खुद के साथ-साथ 5 स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में आय के नए स्रोत खुले हैं और दूसरे युवा भी स्वरोजगार की ओर प्रेरित हो रहे हैं। राजकुमार साव की यह यात्रा साबित करती है कि यदि हुनर को सही दिशा मिले और इरादे नेक हों, तो कोई भी व्यक्ति शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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