राष्ट्रीय राजनीति
46 मिनट पहले
4
विचारों
अदालत का बड़ा फैसला
केरल के कोच्चि में हुए बहुचर्चित मर्सिडीज-बेंज कार हादसे के मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी की जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। आरोपी कोई और नहीं, बल्कि एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के जज का बेटा है। इस फैसले के बाद नाबालिग आरोपी की जमानत बरकरार रहेगी। अतिरिक्त जिला अदालत की न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यानी JJB द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
पुलिस और पीड़ित परिवार की याचिकाएं खारिज
इस मामले में केरल पुलिस और सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 55 वर्षीय स्कूटर सवार जयाबालकृष्णन के परिवार ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। पीड़ित पक्ष का तर्क था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को मिली जमानत उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा था कि क्या नाबालिगों द्वारा किए गए सड़क हादसों के मामलों में पहले कभी बीएनएस की धारा 105 लगाई गई है। इस पर पुलिस ने अदालत को जानकारी दी कि उनके पास ऐसे 9 मामले दर्ज हैं। हालांकि, इन दलीलों के बावजूद अदालत ने बेल रद्द करने की अर्जी को स्वीकार नहीं किया।
क्या है पूरा मामला
यह दर्दनाक घटना 25 अक्टूबर की सुबह चेरानाल्लूर के मराप्परम्बू के पास कंटेनर रोड पर हुई थी। पुलिस के मुताबिक, जज का नाबालिग बेटा तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार चला रहा था। इस दौरान कार ने जयाबालकृष्णन की स्कूटर को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पुलिस ने शुरुआती ढिलाई बरती थी, लेकिन बाद में मामले में बीएनएस की धारा 105 यानी गैर-इरादतन हत्या की धारा जोड़ी गई। इसके साथ ही नाबालिग के जज पिता को भी इस मामले में आरोपी के तौर पर नामजद किया गया था।
पिता को मिली अग्रिम जमानत
मामला केवल बेटे की जमानत तक ही सीमित नहीं रहा। कानूनी दांवपेंच के बीच आरोपी नाबालिग के जज पिता को केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। पुलिस की शुरुआती भूमिका से लेकर अदालती फैसलों तक को लेकर अब समाज में काफी चर्चा और विवाद हो रहा है। आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या प्रभावशाली पृष्ठभूमि के चलते जांच और न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
पीड़ित परिवार की निराशा
अदालत के इस रुख से मृतक जयाबालकृष्णन का परिवार बेहद आहत और मायूस है। मृतक की बेटी भद्रकीर्ति ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पूरा घटनाक्रम किसी ड्रामे जैसा लग रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जिस तरह से दोनों अदालतों से आदेश निकलकर सामने आए हैं, उससे आम आदमी का न्याय प्रणाली पर भरोसा डगमगा गया है। हालांकि, परिवार ने हार मानने से साफ इनकार किया है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी कानूनी लड़ाई को जारी रखेंगे और ऊपरी अदालत में न्याय के लिए गुहार लगाएंगे। इस पूरे मामले में अब सबकी नजरें आगे की कानूनी कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
Comments
0 comment