खेती का नया दौर: सिरोही के किसान एक ही खेत से ले रहे 5 फसलों की बंपर पैदावार राजस्थान एक घंटा पहले 2
सिरोही के तपोवन में किसान मल्टी लेयर फार्मिंग तकनीक के जरिए सीमित जमीन पर एक साथ कई फसलें उगाकर अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं।

मल्टी लेयर फार्मिंग से बदल रही तस्वीर

आमतौर पर किसान एक सीजन में एक ही फसल पर निर्भर रहते हैं, जिससे कभी अतिवृष्टि तो कभी प्राकृतिक आपदाओं के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन सिरोही जिले के तपोवन में किसान अब खेती की एक आधुनिक और वैज्ञानिक विधि अपना रहे हैं जिसे मल्टी लेयर फार्मिंग कहा जाता है। इस तकनीक के जरिए एक ही खेत में एक साथ 3 से 5 तरह की फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे कम लागत में अधिक लाभ कमाना संभव हो गया है।

1.33 एकड़ में प्रयोग

तपोवन में इस अनूठे मॉडल के तहत 1.33 एकड़ भूमि पर विभिन्न स्तरों पर खेती की जा रही है। इसमें ड्रैगन फ्रूट और ताइवानी पपीता जैसे फलों के साथ-साथ विभिन्न सब्जियां और गेंदासूरजमुखी के फूलों का उत्पादन लिया जा रहा है। बीके ललनभाई के अनुसार, इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम जमीन और कम पानी का उपयोग करके अधिक पैदावार लेने के लिए प्रेरित करना है।

फसलों का चयन कैसे करें

इस तकनीक की सफलता सही फसलों के चुनाव पर टिकी है। इसके लिए पौधों की ऊंचाई और उनकी जड़ों की गहराई को ध्यान में रखा जाता है।

  • जमीन के अंदर: आलू, अदरक, हल्दी, गाजर और मूली जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाती है।
  • कम ऊंचाई वाली फसलें: पालक, धनिया और मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियों को चुना जा सकता है।
  • मध्यम और अधिक ऊंचाई वाली फसलें: मिर्च, बैंगन, टमाटर के साथ-साथ मचान विधि से बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी, तोरई, करेला और खीरा उगाए जाते हैं।

तकनीक के प्रमुख लाभ

मल्टी लेयर फार्मिंग न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रखती है। इस पद्धति के कुछ प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:

  • संसाधनों की बचत: इसमें पानी का उपयोग कम होता है और जगह का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित होता है।
  • जैविक खाद: अलग-अलग फसलों के पत्ते जमीन में गिरकर प्राकृतिक रूप से खाद का काम करते हैं।
  • लगातार आय: एक साथ कई फसलें होने के कारण किसान को पूरे सीजन में लगातार कमाई का साधन बना रहता है।
  • आपसी पोषण: एक फसल दूसरी फसल के लिए सहायक का कार्य करती है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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