किशोर कुमार का बिहार से अटूट रिश्ता: भागलपुर की गलियों में क्यों अक्सर लौटते थे महान गायक? मनोरंजन एक घंटा पहले 3
महान गायक किशोर कुमार का बिहार के भागलपुर शहर से गहरा नाता था। भले ही उन्होंने मुंबई में अपार शोहरत हासिल की, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए वे बार-बार भागलपुर आते थे, जहाँ की दुर्गा पूजा और सादगीपूर्ण जीवन शैली उन्हें बेहद पसंद थी।

भागलपुर से किशोर कुमार का अनूठा जुड़ाव

हिंदी सिनेमा के जादुई गायक और अभिनेता किशोर कुमार की आवाज ने पूरे देश को अपना दीवाना बना रखा है। मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कामयाबी का परचम लहराने वाले किशोर कुमार का दिल हमेशा बिहार के भागलपुर शहर के लिए धड़कता था। मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे इस कलाकार का भागलपुर से रिश्ता केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह उनके परिवार की जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ था। यही कारण था कि इतने बड़े स्टार बनने के बाद भी वह खुद को भागलपुर आने से रोक नहीं पाते थे।

मातृकुल और भागलपुर की जड़ें

किशोर कुमार के भागलपुर से लगाव के पीछे का सबसे बड़ा कारण उनकी मां गौरी देवी का मायका था। गौरी देवी का परिवार भागलपुर के आदमपुर क्षेत्र स्थित राजबाड़ी से संबंधित था। उनके नाना के नाम को लेकर विभिन्न दस्तावेजों और स्थानीय चर्चाओं में शिवचंद्र बनर्जी और सतीश चंद्र बनर्जी जैसे नाम सामने आते हैं, जो इस बात को पुष्ट करते हैं कि भागलपुर उनका ननिहाल था। यही राजबाड़ी किशोर कुमार के बचपन के दिनों की यादों का गवाह रही है। आज भी भागलपुर के लोग इस स्थान को किशोर दा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में देखते हैं।

दुर्गा पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी

किशोर कुमार के भागलपुर प्रेम का एक बड़ा हिस्सा वहां की दुर्गा पूजा से जुड़ा था। 1960 के दशक तक, मुंबई में व्यस्त रहने के बावजूद, वे लगभग हर साल दुर्गा पूजा के मौके पर भागलपुर आते थे। वे केवल एक अतिथि की तरह नहीं आते थे, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। वे भागलपुर की कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी जैसी पूजा समितियों द्वारा आयोजित होने वाले नाटकों में शामिल होते थे। यह उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष था, जहां वे खुद को फिल्म स्टार से ज्यादा एक सामान्य इंसान और कलाप्रेमी के रूप में देखना पसंद करते थे।

सादगी और आम आदमी वाला अंदाज

आम तौर पर एक सुपरस्टार के भागलपुर आने पर भारी सुरक्षा और तामझाम की उम्मीद की जाती है, लेकिन किशोर कुमार इसके बिल्कुल विपरीत थे। वे यहां किसी सेलिब्रिटी की तरह नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य के रूप में आते थे। वे अपने मामा शानू बनर्जी के घर जाते थे, सुल्तानगंज स्थित अपने पैतृक बगीचे में आम का आनंद लेते थे और गंगा नदी में नाव की सैर का मजा भी लेते थे। उनकी सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे शहर की सड़कों पर साइकिल चलाते हुए भी देखे जाते थे।

1970 की वो आखिरी याद

किशोर कुमार की भागलपुर यात्राओं में वर्ष 1970 की यात्रा सबसे यादगार मानी जाती है। उस दौरान वे शहर के सैंडीज कंपाउंड मैदान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे। उनके साथ अभिनेत्री और गायिका सुलक्षणा पंडित भी उपस्थित थीं। इसी यात्रा के दौरान एक ऐसी घटना घटी जो आज भी शहर के बुजुर्गों की जुबान पर है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, उन्हें माणिक सरकार चौक के निकट साइकिल चलाते हुए देखा गया था। वे फागू शाह की दुकान पर मिठाई लेने गए थे और उनकी सादगी भरी इस अदा को देखकर प्रशंसकों की भारी भीड़ उनके पीछे हो ली थी। यह दृश्य किसी बड़े फिल्म के शॉट से कम नहीं था।

परिवार का व्यापक प्रभाव

भागलपुर से जुड़ाव सिर्फ किशोर कुमार तक सीमित नहीं था। उनके बड़े भाई और प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार का संबंध भी इसी शहर के परिवारों से रहा है, क्योंकि उनकी शादी इसी शहर के एक परिवार में हुई थी। इस तरह से बनर्जी परिवार और भागलपुर के बीच का यह रिश्ता पीढ़ियों से चला आ रहा था। किशोर कुमार के रिश्तेदार सोमनाथ बनर्जी ने भी समय-समय पर उन दिनों की यादों को साझा किया है, जब किशोर दा घर पर आकर सामान्य खान-पान और पारिवारिक माहौल में वक्त बिताते थे।

स्मृतियों में आज भी जीवित किशोर दा

आज किशोर कुमार हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भागलपुर के आदमपुर की राजबाड़ी से लेकर गंगा के किनारे तक, उनकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। भागलपुर के लोग उन्हें केवल एक महान गायक के रूप में नहीं, बल्कि अपने शहर के उस लाडले के रूप में याद करते हैं, जो मुंबई की चमक-धमक छोड़कर अपनी मिट्टी की खुशबू लेने बार-बार लौटता था। साइकिल की सवारी, मिठाई की दुकान पर उनका वो सरल अंदाज और दुर्गा पूजा के दौरान उनकी उपस्थिति, ये सभी कहानियां आज भी स्थानीय लोगों के बीच एक गौरव की तरह सुनाई जाती हैं। किशोर कुमार का यह भागलपुर कनेक्शन वास्तव में उनकी सादगी और उनके जड़ों से लगाव का एक जीवंत प्रमाण है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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