मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी महेश्वर में इन दिनों आस्था का एक बहुत ही अनोखा और अद्भुत रूप देखने को मिल रहा है। खरगोन जिले के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध तीर्थ स्थल महेश्वर के जगन्नाथ धाम मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। इसका कारण बेहद विशेष और पारंपरिक है। दरअसल, स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मां नर्मदा के अति शीतल जल से महास्नान करने के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अस्वस्थ हो गए हैं। इस बीमारी के चलते भगवान को स्वस्थ करने के लिए 15 दिनों के विशेष एकांतवास में रखा गया है। यह पूरी परंपरा ओडिशा के पुरी में स्थित सुप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर ही निभाई जा रही है, जिसे देखने और महसूस करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु इस पावन स्थल पर पहुंचते हैं।
भगवान के एकांतवास के नियम और सन्नाटा
इस अस्वस्थता के काल में मंदिर के भीतर का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है। मंदिर के गर्भगृह में अब पहले जैसी चहल-पहल नहीं है, बल्कि वहां पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भइया बलभद्र को उनके मुख्य सिंहासन से हटाकर मंदिर के भीतर ही बने एक विशेष एकांतवास कक्ष में स्थापित किया गया है। परंपराओं के अनुसार, इस अवधि में केवल मंदिर के मुख्य पुजारी को ही उस कक्ष में प्रवेश करने की अनुमति होती है ताकि वे भगवान की देखरेख और सेवा कर सकें। आम भक्तों के लिए मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद रखे गए हैं, और अब वे सीधे अपने आराध्य के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
हिमालय की 'केदार कड़वी' और जंगल की दिव्य औषधियां
भगवान को इस बीमारी यानी ज्वर से पूरी तरह मुक्त करने के लिए विशेष आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लिया जा रहा है। भगवान के इस उपचार के लिए देश के कोने-कोने से दुर्लभ जड़ी-बूटियां मंगवाई गई हैं। विशेष रूप से हिमालय की ठंडी वादियों से अत्यंत दुर्लभ जड़ी-बूटी 'केदार कड़वी' मंगवाई गई है। इसके अलावा, स्थानीय जंगलों और विभिन्न क्षेत्रों से भी औषधीय पौधे जुटाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- तुलसी, जो अपने औषधीय और पवित्र गुणों के लिए जानी जाती है।
- अश्वगंधा, जो शारीरिक शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
- गिलोय, जो बुखार को दूर करने में सबसे उत्तम मानी जाती है।
- पुनर्नवा, जायफल और जावित्री, जो शरीर की उष्णता को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
- लेंडी पीपल, जो श्वसन तंत्र और ज्वर निवारण में अत्यंत लाभकारी है।
इन सभी औषधियों को एकत्रित करके मंदिर के मुख्य महंत हृदय गिरि महाराज खुद अपने हाथों से तैयार कर रहे हैं। वे पहले इन जड़ी-बूटियों को विशेष मंत्रोच्चार के माध्यम से अभिमंत्रित करते हैं। इसके बाद, इन्हें अच्छी तरह से पीसकर एक विशेष काढ़ा तैयार किया जाता है। यही पवित्र काढ़ा भगवान को सुबह और शाम नियमपूर्वक औषधि के रूप में अर्पित किया जा रहा है ताकि वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें।
भोजन में बदलाव: भगवान को दी जा रही है लिक्विड डाइट
बीमारी के इस नाजुक दौर में भगवान की दिनचर्या के साथ-साथ उनके खान-पान और भोग में भी बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। आम दिनों में जहां भगवान जगन्नाथ को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का महाभोग लगाया जाता है और तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान चढ़ाए जाते हैं, वहीं इस समय उनका पूरा भोजन सादा और हल्का कर दिया गया है। बीमारी के दौरान भगवान को कोई भी ठोस आहार नहीं दिया जा रहा है, वे पूरी तरह से लिक्विड डाइट यानी तरल आहार पर हैं। उनके भोग में इस समय केवल निम्नलिखित चीजें ही शामिल की गई हैं:
- ऋषि-मुनियों द्वारा अभिमंत्रित किया गया विशेष जड़ी-बूटियों का काढ़ा
- हल्की मिठास और शक्ति देने वाला केसर-बादाम युक्त गुनगुना दूध
- पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए मौसमी और ताजे फलों का शुद्ध रस
तेज बुखार उतारने के लिए शरीर पर शीतल लेप
भगवान को तेज ज्वर से तुरंत राहत प्रदान करने के लिए एक बेहद प्राचीन पद्धति का पालन किया जा रहा है। जिस प्रकार घर में किसी मनुष्य को तेज बुखार होने पर उसके माथे पर ठंडी पट्टियां रखी जाती हैं, ठीक उसी तरह भगवान के शरीर के तापमान को कम करने के लिए उनके मस्तक और पूरे विग्रह पर एक विशेष शीतल लेप लगाया जा रहा है। इस लेप को तैयार करने के लिए बहुत ही ठंडी और कीमती सामग्रियों का चयन किया गया है। महंत हृदय गिरि महाराज के अनुसार, इस लेप को बनाने के लिए नीचे दी गई सामग्रियों का उपयोग किया जाता है:
- असली कस्तूरी
- मलयागिरी का चंदन
- मुल्तानी मिट्टी
- शुद्ध शहद और गुलाब जल
- हल्दी और भीमसेनी कर्पूर
यह लेप भगवान के मस्तक और पूरे शरीर पर अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ लगाया जाता है, जिससे उनकी शारीरिक तपन शांत होती है और उन्हें शीतलता का अनुभव होता है।
15 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
मंदिर के मुख्य महंत हृदय गिरि महाराज ने पूरी श्रद्धा के साथ बताया कि 15 दिनों के इस गहन उपचार और विश्राम के बाद भगवान पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएंगे। आगामी 15 जुलाई को भगवान अपने दिव्य नवयौवन रूप में भक्तों के सामने प्रकट होंगे और उन्हें दर्शन देंगे। इस पावन अवसर पर मंदिर में विशेष षोडशोपचार पूजन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इसके अगले ही दिन, यानी 16 जुलाई को, भगवान जगन्नाथ, भइया बलभद्र और देवी सुभद्रा के साथ विशाल रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस भव्य रथयात्रा का स्वागत करने और भगवान के दर्शन पाने के लिए महेश्वर और आसपास के पूरे क्षेत्र के श्रद्धालु अत्यंत उत्सुकता और बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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