MRSAM: भारतीय आसमान का नया अभेद्य कवच, आकाश मिसाइल का यह ताकतवर बड़ा भाई पलक झपकते ही दुश्मनों को करेगा ढेर राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 77
भारत और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित MRSAM मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारतीय वायुक्षेत्र में सुरक्षा की नई दीवार बनकर उभरा है, जो कम दूरी की आकाश मिसाइल और लंबी दूरी के S-400 के बीच की दूरी को पाटने का काम करेगा।

भारतीय सीमाओं पर बढ़ते हवाई खतरों से निपटने के लिए देश की हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत और अचूक बनाया जा रहा है। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर लगातार बढ़ रही चुनौतियों के बीच भारतीय आसमान की सुरक्षा के लिए एक बेहद शक्तिशाली सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। भारत और इजरायल के साझा प्रयासों से विकसित मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल यानी MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मनों के होश उड़ाने के लिए तैयार है। रक्षा विशेषज्ञ इस ताकतवर मिसाइल प्रणाली को भारत की मशहूर आकाश मिसाइल का बड़ा भाई मान रहे हैं। यह नया मिसाइल सिस्टम कम दूरी की आकाश मिसाइल की तुलना में बहुत अधिक संहारक और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है। हालांकि, यह प्रणाली रूस के बेहद शक्तिशाली S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से क्षमता में थोड़ी कम है, लेकिन इसके सेना में शामिल होने से भारतीय वायुक्षेत्र की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी।

डीआरडीओ और इजरायल की बेमिसाल जुगलबंदी

इस अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विकास भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने मिलकर किया है। दोनों देशों के इस संयुक्त प्रयास ने भारतीय सुरक्षा बलों के लिए एक ऐसा अभेद्य कवच तैयार किया है जो भारतीय आकाश में शॉर्ट रेंज और लॉन्ग रेंज प्रणालियों के बीच के खाली स्थान को पूरी तरह से भर देता है। भारत की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इस आधुनिक हथियार के बड़े पैमाने पर उत्पादन यानी मास प्रोडक्शन को हरी झंडी दे दी है। यह सिस्टम हमारी थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां नौसेना के लिए इसके विशेष नौसैनिक संस्करण को LRSAM या बराक-8 के नाम से जाना जाता है।

MRSAM की अद्वितीय मारक क्षमता और खूबियां

यह मिसाइल सिस्टम कई मायनों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा प्रणालियों को टक्कर देता है। इसकी तकनीकी खूबियां इसे बेहद खास और अचूक बनाती हैं:

  • मारक रेंज: यह मिसाइल प्रणाली न्यूनतम 0.5 किलोमीटर से लेकर अधिकतम 70 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के किसी भी हवाई खतरे को पलक झपकते ही नष्ट करने की ताकत रखती है।
  • ऊंचाई और सीमा: आसमान में उड़ रहे दुश्मनों के विमानों को यह मिसाइल करीब 16 किलोमीटर (यानी लगभग 52,000 फीट) की ऊंचाई तक जाकर आसानी से अपना निशाना बना सकती है।
  • घातक रफ्तार: हवा में इस मिसाइल की रफ्तार बेहद आक्रामक और तेज है। यह Mach 2 यानी ध्वनि की गति से दोगुनी रफ्तार से उड़ान भरती है, जो लगभग 2,469 किलोमीटर प्रति घंटा बैठती है। इतनी तेज रफ्तार के कारण दुश्मन को संभलने या बचने का कोई मौका नहीं मिलता।
  • पेलोड और वॉरहेड क्षमता: यह मिसाइल अपने साथ लगभग 60 किलोग्राम वजन का प्री-फ्रेगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इसमें एक विशेष प्रॉक्सिमिटी फ्यूज लगा होता है, जो दुश्मन के विमान या ड्रोन के बिल्कुल करीब पहुंचते ही एक्टिव होकर जोरदार धमाका करता है और उसे हवा में ही राख कर देता है।

इस एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीकी मजबूती के तीन स्तंभ

इस पूरे मिसाइल सुरक्षा तंत्र को सुचारू और सटीक तरीके से काम करने के लिए तीन मुख्य घटकों में विभाजित किया गया है:

पहला घटक इसका कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है। यह प्रणाली आने वाले किसी भी तरह के हवाई खतरे को तुरंत पहचानती है, उसका विश्लेषण करती है और उसे नष्ट करने के लिए तेजी से फैसले लेती है।

दूसरा महत्वपूर्ण घटक इसका मल्टी-फंक्शन सर्विलांस ट्रैकिंग रडार (MF-STAR) है। इजरायल की अत्याधुनिक रडार तकनीक पर आधारित यह रडार 360 डिग्री के दायरे में नजर रखता है। यह रडार 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी से आ रहे कई खतरों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।

तीसरा हिस्सा इसका मोबाइल लॉन्चर सिस्टम है। यह सिस्टम वर्टिकल लॉन्च तकनीक के जरिए संचालित होता है, जिसकी मदद से मिसाइल को बिना समय गंवाए किसी भी दिशा में तुरंत दागा जा सकता है।

एक्टिव रडार सीकर: दुश्मन का बचना नामुमकिन

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका एक्टिव रडार सीकर माना जाता है। हमले के बिल्कुल अंतिम पलों में यह मिसाइल पूरी तरह से अपने स्वयं के रडार सिस्टम पर निर्भर हो जाती है। यदि दुश्मन का लड़ाकू विमान हवा में तेजी से अपनी दिशा बदलने या पैंतरेबाजी करने की कोशिश भी करता है, तो भी यह सीकर उसका पीछा नहीं छोड़ता और टारगेट को लॉक करके उसे नष्ट कर देता है।

वैश्विक स्तर की अन्य प्रणालियों से मुकाबला

जब हम भारत और इजरायल की इस MRSAM तकनीक की तुलना दुनिया के अन्य प्रमुख मिसाइल प्रणालियों से करते हैं, तो इसकी मजबूती साफ नजर आती है:

रूस के S-350 Vityaz की बात करें तो यह भी एक मीडियम रेंज SAM है, जिसकी अधिकतम रेंज 60 से 120 किलोमीटर और ऊंचाई 30 किलोमीटर तक होती है। इसकी रफ्तार Mach 4.5 होती है और यह अत्यधिक सघन मारक क्षमता के लिए जाना जाता है।

वहीं अमेरिका और नॉर्वे के संयुक्त सिस्टम NASAMS III को देखें तो यह एक शॉर्ट-टू-मीडियम रेंज सिस्टम है। इसकी अधिकतम रेंज 30 से 50 किलोमीटर और ऊंचाई 21 किलोमीटर होती है। Mach 4.0 की रफ्तार वाली यह प्रणाली मुख्य रूप से क्रूज मिसाइल डिफेंस के लिए उपयोगी है।

इन दोनों के मुकाबले भारत की MRSAM 70 किलोमीटर की शानदार रेंज, 16 किलोमीटर की ऊंचाई और Mach 2.0 की गति के साथ 360 डिग्री वर्टिकल लॉन्च की सुविधा देती है, जो इसे बेहद सटीक और बहुउपयोगी बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

सवाल: MRSAM हवा में किन-किन खतरों को पूरी तरह तबाह कर सकती है?

जवाब: यह उन्नत रक्षा प्रणाली हवा में एक साथ कई प्रकार के खतरों से निपटने में सक्षम है। यह दुश्मन के आधुनिक लड़ाकू विमानों, मानव रहित विमानों यानी UAVs और ड्रोन्स, गाइडेड बमों, लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को बेहद सटीक तरीके से हवा में ही नष्ट कर सकती है।

सवाल: क्या यह सिस्टम पूरी तरह से 'दागो और भूल जाओ' तकनीक पर काम करता है?

जवाब: हां, यह सिस्टम काफी हद तक इसी आधुनिक तकनीक पर काम करता है। मिसाइल छोड़े जाने के शुरुआती दौर में इसे मुख्य रडार से लगातार अपडेट मिलते रहते हैं, लेकिन हमले के अंतिम चरण में इसका अपना खुद का एक्टिव रडार सीकर पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है। इसके बाद यह मिसाइल खुद ही टारगेट को लॉक करके उसे समाप्त कर देती है।

सवाल: भारतीय सेना के लिए इस मिसाइल प्रणाली का क्या महत्व है?

जवाब: भारतीय सैन्य बलों के लिए यह मिसाइल सिस्टम रीढ़ की हड्डी के समान है। यह हमारे देश के अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण ठिकानों जैसे सैन्य हवाई अड्डों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और युद्ध के मैदान में गतिशील सैन्य टुकड़ियों को दुश्मन के हवाई हमलों के खिलाफ एक मजबूत और अभेद्य सुरक्षा छतरी प्रदान करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कम दूरी वाली आकाश मिसाइल और लंबी दूरी के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बीच मौजूद बड़े गैप को सफलतापूर्वक भरने का काम करता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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