उल्टी दिशा में बहने वाली नर्मदा: कुंवारी नदी कहलाने के पीछे की रहस्यमयी कहानी मध्य प्रदेश एक महीने पहले 27
देश की ज्यादातर नदियां पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन नर्मदा पश्चिम दिशा में बहकर अरब सागर में मिलती है। इसके पीछे पौराणिक कथा और वैज्ञानिक कारण दोनों जुड़े हुए हैं।

भारत की पवित्र नदियों में गिनी जाने वाली नर्मदा अपने निराले प्रवाह और इससे जुड़ी रहस्यमयी कहानियों के कारण एक खास पहचान रखती है। देश की अधिकांश नदियां जहां पूर्व दिशा की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती हैं, वहीं नर्मदा इसके उलट पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और अंततः अरब सागर में समाहित हो जाती है। इसी असामान्य दिशा के कारण यह नदी सदियों से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई है।

पौराणिक मान्यता क्या कहती है

लोक मान्यताओं के अनुसार नर्मदा के विपरीत दिशा में बहने के पीछे एक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि सोनभद्र के द्वारा विश्वासघात किए जाने पर मां नर्मदा ने अपना रास्ता ही बदल लिया और जीवनभर अविवाहित रहने का संकल्प ले लिया। इसी कारण उन्हें 'कुंवारी नदी' के नाम से भी जाना जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वहीं वैज्ञानिकों की राय इस रहस्य को भूगोल से जोड़कर देखती है। उनके अनुसार नर्मदा एक रिफ्ट वैली में बहती है, जिसकी भौगोलिक ढलान पश्चिम दिशा की ओर है। यही कारण है कि नदी का प्रवाह स्वाभाविक रूप से पश्चिम की तरफ बना रहता है।

आस्था, इतिहास और भूगोल का संगम

लगभग 1077 किलोमीटर लंबी यह नदी आस्था, इतिहास और भूगोल का अद्भुत मेल प्रस्तुत करती है। एक ओर जहां इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं इसे श्रद्धा का प्रतीक बनाती हैं, वहीं इसका अनूठा प्रवाह इसे भौगोलिक दृष्टि से भी बेहद खास बना देता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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