मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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त्योहारों के मौसम में महंगाई की मार
रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार अब बिल्कुल करीब है। यह समय मिठाइयों और खुशियों का होता है, लेकिन इस बार त्योहार की रौनक पर महंगाई का साया गहराता दिख रहा है। मध्य प्रदेश के खंडवा में रसोई की जरूरी चीजों, विशेषकर चीनी और प्याज की कीमतों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने आम नागरिकों, विशेषकर गृहणियों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। त्योहारों के दौरान घरों में बनने वाली मिठाइयों और पकवानों पर इस महंगाई का सीधा असर पड़ता दिखाई दे रहा है। चीनी के दामों में लगी आग ने न केवल घरेलू बजट को बिगाड़ा है, बल्कि मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ने की भी आशंका जता दी है।
चीनी और प्याज के दामों में भारी उछाल
खंडवा के स्थानीय बाजारों की स्थिति पर नजर डालें तो पिछले कुछ समय में चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं। कभी 44 से 45 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाली चीनी अब थोक बाजार में 63 से 65 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, आम किराना दुकानों पर उपभोक्ताओं को यही चीनी 70 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा की कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके साथ ही प्याज की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखी जा रही है। बाजार में प्याज अब 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहा है। इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर रसोई के मासिक खर्च को प्रभावित किया है।
गृहणियों की चिंता और प्रतिक्रिया
महंगाई की इस मार को लेकर स्थानीय महिलाओं ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अनीता धोत्रे का मानना है कि त्योहार से ठीक पहले इस तरह की महंगाई ने घर चलाना मुश्किल कर दिया है। उनका कहना है कि चाय जैसे दैनिक उपयोग की चीजों में चीनी सबसे अहम है और इसके भाव 40 रुपये से बढ़कर 70-80 रुपये तक पहुंच जाने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। वहीं, दुर्गा गंगराड़े ने महंगाई पर तंज कसते हुए कहा कि अब प्याज काटते समय तो नहीं, बल्कि बाजार में प्याज खरीदते समय आंखों से आंसू निकल आते हैं। उनका कहना है कि सब्जी का मुख्य आधार प्याज है, जिसके दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम होने से पूरी रसोई का हिसाब-किताब बिगड़ गया है।
अन्य खर्चों का बोझ
केवल रसोई की सामग्री ही नहीं, बल्कि आम जनता पर अन्य मोर्चों पर भी खर्च का दबाव बना हुआ है। रानी दशोरे बताती हैं कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से लेकर घर की अन्य जरूरी वस्तुओं तक, हर स्तर पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि एक तरफ पारिवारिक आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जबकि दूसरी तरफ जरूरी चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं, जिससे तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जान्हवी मंडलोई ने इस स्थिति पर जोड़ते हुए कहा कि पहले ही बजट को मैनेज करना बड़ी समस्या थी और अब चीनी और प्याज की कीमतों ने इस परेशानी को और अधिक गंभीर बना दिया है। त्योहार के समय वैसे भी घर के अन्य खर्च बढ़ जाते हैं, ऐसे में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की यह महंगाई पूरे परिवार के आर्थिक संतुलन को बिगाड़ रही है।
मिठाई पर महंगाई का असर
राखी के मौके पर मिठाइयों की खपत और बिक्री बहुत अधिक रहती है। चूंकि चीनी मिठाई बनाने के लिए सबसे प्रमुख सामग्री है, इसलिए बाजार में इसके ऊंचे दामों का सीधा असर मिठाई की लागत पर पड़ेगा। अब यह देखने वाली बात होगी कि मिठाई कारोबारी अपनी लागत में हुई इस वृद्धि का कितना भार ग्राहकों पर डालते हैं। फिलहाल, खंडवा में इन दो आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने त्योहार से पहले ही लोगों की खुशियों को फीका कर दिया है। अब आम आदमी को इस बात की चिंता सता रही है कि क्या इस बार राखी पर मिठाई का स्वाद भी महंगाई की भेंट चढ़ जाएगा या फिर बाजार में कुछ राहत देखने को मिलेगी। आने वाले कुछ दिन यह स्पष्ट कर देंगे कि इस महंगाई का त्योहार की खरीदारी पर कितना गहरा असर पड़ता है।
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