मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आकार ले रही देश की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग अब पूरी होने की कगार पर है। यदि काम तय समय पर आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले कुछ महीनों में नर्मदा का जल पांच जिलों के खेतों और घरों तक पहुंचने लगेगा। राज्य की इस अत्यंत महत्वाकांक्षी जल परियोजना से इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सैकड़ों तकनीकी अड़चनों और विदेशी मशीनों की नाकामी के बावजूद यहां निर्माण कार्य लगातार चलता रहा।
अंतिम चरण में पहुंची देश की सबसे लंबी जल सुरंग
कटनी जिले में बन रही यह वाटर टनल अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। 17 साल तक चले इस विशाल प्रोजेक्ट के दौरान अमेरिकी मशीनें नाकाम रहीं, सैकड़ों बार सिंक होल बने, कई मजदूरों की जान गई और लागत भी दोगुनी हो गई। इन सबके बीच 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद टनल लगभग बनकर तैयार हो चुकी है। इसके शुरू होते ही पहली बार नर्मदा नदी का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर गुजरेगा और प्रदेश के 5 जिलों के लाखों लोगों को सिंचाई तथा पेयजल की सुविधा मुहैया कराएगा।
कटनी जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्लीमनाबाद क्षेत्र में जमीन से 80 से 100 फीट नीचे यह ऐतिहासिक परियोजना खड़ी की जा रही है। बरगी व्यपवर्तन योजना की शुरुआत साल 2008 में हुई थी, जिसका मकसद बरगी बांध के नर्मदा जल को सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना था। 11.95 किलोमीटर लंबी इस भूमिगत सुरंग में अब महज 75 मीटर के आसपास की खुदाई बाकी रह गई है, जिसे जून के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। स्लीमनाबाद की जटिल भूगर्भीय बनावट ने इंजीनियरों की राह बेहद कठिन बना दी थी।
1.6 किलोमीटर में लगे साढ़े छह साल, 1600 करोड़ पहुंची लागत
संगमरमर, चूना पत्थर, डोलोमाइट और स्लेट की परतों के बीच खुदाई के लिए साल 2011 में मंगाई गई अमेरिकी रोबिन्स टनल बोरिंग मशीन भी टूट गई। शुरुआती 1.6 किलोमीटर की खुदाई में ही साढ़े छह साल खर्च हो गए। इसके बाद जर्मन तकनीक और नई मशीनों की मदद से काम को रफ्तार दी गई।
सुरंग के निर्माण के दौरान 300 से अधिक बार सिंक होल बनने की घटनाएं सामने आईं। कहीं जहरीली गैस निकली तो कहीं अचानक पानी का रिसाव होने लगा। कई बार मिट्टी धंसने के कारण निर्माण रोकना पड़ा और करीब 80 परिवारों को विस्थापित भी करना पड़ा। इन तमाम चुनौतियों के बीच कई मजदूरों ने अपनी जान गंवाई। इन्हीं वजहों से 799 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत बढ़कर करीब 1600 करोड़ रुपए तक जा पहुंची।
इन 5 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
समूची परियोजना में करीब 197 किलोमीटर लंबी नहर, पाइपलाइन और टनल प्रणाली विकसित की जा रही है। काम पूरा होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा समेत जल संकट से जूझ रहे कई इलाकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और पेयजल की किल्लत से भी राहत मिलेगी।
नर्मदा और सोन के मिलन की मान्यता बनेगी हकीकत
नर्मदा और सोन नदी को लेकर एक रोचक मान्यता भी प्रचलित है। कहा जाता है कि अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलने वाली ये दोनों नदियां ऐसे प्रेमी हैं, जो कभी एक-दूसरे से मिल नहीं सके। लेकिन अब स्लीमनाबाद टनल के जरिए नर्मदा का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से गुजरकर सोन बेसिन तक पहुंचेगा और यह ऐतिहासिक जल मिलन सच्चाई में बदल जाएगा।
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