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2 घंटे पहले
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विचारों
करवा चौथ का पर्व और चंद्रोदय का महत्व
करवा चौथ का त्योहार देशभर में, विशेषकर उत्तर भारत में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज के दिन सुहागिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। दिन भर की कठिन तपस्या और पूजा-अर्चना के बाद व्रत का समापन चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के साथ होता है। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाली हजारों महिलाएं इस समय आसमान में चांद के निकलने की प्रतीक्षा कर रही हैं। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, आज रात चंद्रोदय का समय तय हो चुका है, जिससे जुड़ी पूरी सूची नीचे दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में चंद्रोदय का समय
चंद्रमा के दर्शन का समय अलग-अलग शहरों की भौगोलिक स्थिति के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है। पंचांग के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली और आसपास के इलाकों में चांद के दीदार का अनुमानित समय इस प्रकार है:
- दिल्ली: 8 बजकर 20 मिनट
- नोएडा: 8 बजकर 21 मिनट
- ग्रेटर नोएडा: 8 बजकर 21 मिनट
- गाजियाबाद: 8 बजकर 21 मिनट
- मेरठ: 8 बजकर 18 मिनट
- बुलंदशहर: 8 बजकर 20 मिनट
- हापुड़: 8 बजकर 9 मिनट
- बागपत: 7 बजकर 41 मिनट
- मुजफ्फरनगर: 8 बजकर 17 मिनट
- शामली: 7 बजकर 39 मिनट
- गुरुग्राम: 8 बजकर 23 मिनट
- फरीदाबाद: 8 बजकर 22 मिनट
- सोनीपत: 8 बजकर 22 मिनट
- पलवल: 8 बजकर 23 मिनट
- पानीपत: 8 बजकर 10 मिनट
- रोहतक: 8 बजकर 12 मिनट
- रेवाड़ी: 8 बजकर 12 मिनट
- झज्जर: 8 बजकर 19 मिनट
- नूंह (मेवात): 8 बजकर 14 मिनट
- करनाल: 8 बजकर 10 मिनट
- जींद: 8 बजकर 11 मिनट
- भिवानी: 8 बजकर 16 मिनट
- महेंद्रगढ़: 8 बजकर 12 मिनट
- चरखी दादरी: 7 बजकर 46 मिनट
- अलवर: 8 बजकर 15 मिनट
- भरतपुर: 8 बजकर 15 मिनट
धुंध और मौसम का असर
ऊपर बताए गए समय की गणना ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर की गई है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से चंद्रमा को देखने के लिए मौसम की स्थिति का अनुकूल होना आवश्यक है। यदि आपके क्षेत्र में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं या प्रदूषण का स्तर अधिक है, तो चांद दिखने में 10 से 15 मिनट तक की देरी हो सकती है। सभी व्रती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे धैर्य रखें और चंद्रमा के उदय होते ही विधि-विधान से अर्घ्य देकर अपना निर्जला व्रत पूर्ण करें।
पूजा की तैयारी और सावधानियां
करवा चौथ की पूजा के लिए महिलाएं शाम से ही सोलह श्रृंगार कर तैयार हो जाती हैं। चंद्रमा के उदय होने के बाद छलनी से चांद को देखने और फिर अपने पति का मुख देखने की परंपरा है। इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर उनका व्रत खुलवाते हैं। इस पवित्र दिन पर सभी को शांति और भक्ति भाव बनाए रखने की सलाह दी जाती है। आप अपने शहर के अनुसार ऊपर दी गई सूची का मिलान कर अपनी पूजा की तैयारी समय रहते पूरी कर सकती हैं।
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