कानपुर में मजदूरों की हलचल ने बढ़ाई उद्योगपतियों की धड़कनें, नोएडा जैसे हालात की आशंका उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 1
कानपुर की कई औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक वेतन बढ़ोतरी, काम के घंटे घटाने और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उद्योग जगत को आशंका है कि कहीं यहां नोएडा जैसे हालात न बन जाएं।

औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले कानपुर में इन दिनों श्रमिकों की मांगों को लेकर बढ़ती सरगर्मी ने उद्योग जगत की बेचैनी बढ़ा दी है। बीते करीब एक महीने में शहर की कई औद्योगिक इकाइयों में कामगारों ने वेतन वृद्धि, काम के घंटों में कटौती और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। उद्योग से जुड़े लोगों को आशंका है कि जिस तरह कुछ समय पहले नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आवाज प्रदेश स्तर तक गूंजी थी, कहीं वैसे ही हालात कानपुर में न पैदा हो जाएं। इसके लिए वे समय रहते समाधान को जरूरी मानते हैं।

महंगाई के बीच वेतन बढ़ाने की पुकार

श्रमिकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के चलते मौजूदा वेतन में परिवार चलाना कठिन होता जा रहा है। उनका मानना है कि मजदूरी में इजाफा अब वक्त की मांग बन चुकी है। इसके साथ ही कई कामगारों ने लंबे कार्य घंटों को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई जगहों पर उनसे 12 घंटे तक काम कराया जाता है, जबकि वे नियमित रूप से आठ घंटे की ड्यूटी चाहते हैं।

पिछले कुछ सप्ताह में शहर के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही कई इकाइयों के बाहर कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगें रख चुके हैं। कुछ स्थानों पर श्रमिकों ने चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी दिक्कतों का हल नहीं निकला तो आगे बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जा सकता है।

उद्योग और श्रम एक-दूसरे के पूरक

फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल का कहना है कि उद्योग और श्रम एक-दूसरे के बगैर अधूरे हैं। श्रमिक किसी भी औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी ताकत होते हैं और उद्यमी हमेशा उनके हितों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक उद्यमी परिवार का ही हिस्सा हैं और दोनों का मकसद एक ही है—उद्योग का बेहतर संचालन और रोजगार की निरंतरता।

अग्रवाल के अनुसार कुछ मामलों में बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अधिकतर श्रमिक मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करना चाहते हैं। वहीं उद्यमी भी यही चाहते हैं कि उनकी इकाइयां बिना किसी रुकावट के चलती रहें। ऐसे में संवाद और आपसी समझ ही सबसे बेहतर रास्ता है।

दादा नगर समेत कई क्षेत्रों में फैला उद्योग

उद्योग विभाग के मुताबिक, कानपुर के दादा नगर औद्योगिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं। यहां इंजीनियरिंग गुड्स, पेंट, बेकरी उत्पाद, स्टील, सैडलरी और कई अन्य उत्पादों का निर्माण होता है। इसके अलावा फजलगंज, रूमा, चकेरी, मंधना और इस्पात नगर जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में उद्योग चल रहे हैं, जहां हजारों श्रमिक काम करते हैं।

उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह का कहना है कि अगर श्रमिक अपनी समस्याएं विभाग के सामने रखते हैं, तो उनके समाधान का पूरा प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि बातचीत और तालमेल के जरिए किसी भी विवाद को सुलझाया जा सकता है। कानपुर की अर्थव्यवस्था में उद्योग और श्रमिक दोनों की अहम भूमिका है। ऐसे में श्रमिकों की जायज मांगों और उद्योगों की व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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