पश्चिम बंगाल
एक दिन पहले
8
विचारों
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान की गूंज और तेज हो गई है। पार्टी के बागी सांसदों के बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचने और पाला बदलने की चर्चाओं के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता मैदान में कूद पड़े हैं। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों, खासतौर पर काकोली घोष दस्तीदार और शर्मिला सरकार पर हमला बोला है। दोनों नेताओं ने उन्हें गद्दार करार देते हुए चुनौती दी कि अगर उनमें थोड़ी भी गैरत बची है, तो वे सांसद पद छोड़ें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें।
सुबह से बंद है काकोली का फोन
इस पूरे घटनाक्रम के बीच काकोली घोष दस्तीदार का फोन आज सुबह से बंद बता रहा है। उनके करीबी लोगों तक के पास भी स्पीकर से उनकी मुलाकात को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है।
"स्पीकर के पास नहीं पहुंची कोई चिट्ठी"
कल्याण बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार ने स्पीकर को जो चिट्ठी लिखी थी, वह 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि लोकसभा स्पीकर के कार्यालय का भी कहना है कि उन्हें अभी तक कोई चिट्ठी नहीं मिली है। बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा, "जिस तरह वे लोग भूपेंद्र यादव के घर गए, किसने मिलवाया और कैसे मिलवाया, यह तो पता नहीं, लेकिन अब उनके नेता पीएम नरेंद्र मोदी हो गए हैं, ममता बनर्जी नहीं रहीं। उनके पास 20-21 या जितने भी सांसद हों, अगर उन्हें 10वीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचना है, तो बीजेपी में शामिल होना ही पड़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "चुनाव के दौरान यही काकोली दस्तीदार ममता बनर्जी की तारीफ करते नहीं थकती थीं। जो नेता प्रशंसा करते नहीं थकते थे, वे अब बहाना बना रहे हैं कि टीएमसी में रहकर वे विकास का काम नहीं कर पा रहे थे। अगर बीजेपी में जाना है तो जाएं, टिकट लें और चुनाव लड़ें। इन सभी लोगों ने गद्दारी की है, ये सब गद्दार हैं।"
कल्याण बनर्जी ने कहा, "जैसे ही ये सभी बागी सांसद भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, सबके चेहरे बेनकाब हो गए। जब आरजी कर की घटना हुई, तब शर्मिला सरकार और काकोली दस्तीदार कहां थीं? उस वक्त वे नहीं बोलीं, लेकिन मैं बोला। अगर काकोली दस्तीदार कह रही हैं कि उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो फिर वे चीफ व्हिप का पद कैसे मांग सकती हैं? यह पद तो पार्टी के सांसदों को सदन में संभालने के लिए होता है। एनडीए एक गठजोड़ है, कोई पार्टी नहीं। आपके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, आपको डर है कि पार्टी से निकाल दिए जाएंगे। अब जब बीजेपी के गुंडे तुम्हारे कार्यकर्ताओं को मारेंगे, तब क्या करोगे?"
"सिर्फ 32 लाख वोट से हराया गया, हम हारे नहीं"
कल्याण बनर्जी ने आक्रामक तेवर में कहा, "अगर तुममें जरा भी गैरत है तो बोलो। जब तुम्हारे कार्यकर्ता पिटेंगे, तब हम लड़ने जाएंगे। हमें सिर्फ 32 लाख वोट से हराया गया, हम हारे नहीं हैं। 29 के अंदर केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी साफ हो जाएगी।" उन्होंने काकोली और शर्मिला पर निशाना साधते हुए कहा, "बताएं, तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ? तुम तो मूंग और मसूर की दाल हो। पांच बार चुनाव हारीं, फिर भी दीदी ने तुम्हें जिताया। तुम संसद नहीं आती थीं, इसलिए तुम्हें चीफ व्हिप से हटाया गया। बताओ, तुम्हारी अपनी पार्टी क्या है? कभी तृणमूल का नाम मत लेना। जब शेरनी घायल होती है, तो वह और भी खतरनाक हो जाती है। यह पार्टी विरासत में नहीं मिली है।"
"गद्दारों को जाना है तो जाएं, तृणमूल का नाम न लें"
पार्टी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी गुट को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और बागी सांसदों को शर्म आनी चाहिए। आजाद ने कहा कि काकोली घोष तीन चुनाव हारीं, इसके बावजूद ममता जी ने उन्हें सांसद बनवाया। उन्हें व्हिप से इसलिए हटाया गया क्योंकि वे संसद नहीं आती थीं। उन्होंने कहा, "अगर कोई तकलीफ थी, तो पहले बतातीं। अब भूपेंद्र यादव के यहां चाय पी रहे हो। गद्दारों को जाना है तो जाएं, लेकिन कभी तृणमूल का नाम न लें। मां-माटी-मानुष की बात करते हैं, यह पार्टी विरासत में नहीं मिली है।"
Comments
0 comment