कैमूर डीटीओ ऑफिस में 15.96 करोड़ का बड़ा घोटाला, वसूली गई रकम का नहीं मिल रहा हिसाब बिहार 54 मिनट पहले 3
बिहार के कैमूर जिला परिवहन कार्यालय में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वाहनों से वसूले गए जुर्माने की बड़ी रकम सरकारी खजाने तक नहीं पहुंची।

कैमूर परिवहन कार्यालय में वित्तीय धांधली का खुलासा

बिहार के कैमूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाहनों से वसूले गए जुर्माने के करोड़ों रुपये सरकारी खाते में जमा ही नहीं किए गए, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। यह मामला अब भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट तक पहुंच चुका है, जिसमें कई अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

क्या है पूरा मामला

ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो मई 2019 से लेकर दिसंबर 2023 के बीच सड़क सुरक्षा जांच और अन्य अभियानों के दौरान वाहनों से कुल 26.91 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था। सरकारी नियमों के मुताबिक, इस पूरी राशि को सरकारी खजाने में जमा होना अनिवार्य था, लेकिन जांच में पाया गया कि इसमें से केवल 10.96 करोड़ रुपये ही सरकारी खाते में पहुंचे हैं। इस तरह करीब 15.96 करोड़ रुपये का कहीं कोई अता-पता नहीं है, जिसे एक गंभीर वित्तीय अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है।

जिम्मेदारों से मांगा गया हिसाब

इस गड़बड़ी के बाद महालेखाकार कार्यालय ने संबंधित तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, मोटर वाहन निरीक्षक, प्रवर्तन अवर निरीक्षक, नाजिर और कार्यालय से जुड़े अन्य कर्मचारियों से इस राशि का पूरा लेखा-जोखा तलब किया था। हालांकि, ऑडिट प्रक्रिया के दौरान इनमें से कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी इस राशि के जमा होने से संबंधित संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

कार्रवाई में सुस्ती पर उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार, महालेखाकार कार्यालय ने 8 जनवरी 2026 को कैमूर परिवहन कार्यालय को नोटिस जारी कर आपत्तियों का स्पष्टीकरण मांगा था। प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, निर्धारित समय सीमा के भीतर विभाग स्तर पर इन आपत्तियों का निपटारा न हो सका, जिसके कारण यह मामला स्वतः ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के ऑडिट पैरा में शामिल हो गया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बावजूद अब तक न तो राशि की रिकवरी हो पाई है और न ही दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई है।

दस्तावेजों का अभाव

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब वर्ष 2023 के बाद महालेखाकार की टीम ने कैमूर परिवहन कार्यालय में गहन ऑडिट किया। जांच में पाया गया कि जुर्माने की वसूली तो की गई, लेकिन उसे सरकारी खजाने में जमा करने से संबंधित अनिवार्य रसीदें या अन्य दस्तावेज गायब हैं। फिलहाल, पूरे मामले के खुलासे के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और अब यह देखना बाकी है कि शासन-प्रशासन स्तर पर इसमें किस तरह की आगे की कार्रवाई की जाती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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