बकरी पालन में बरती गई एक लापरवाही पड़ सकती है भारी, मानसून में सिर्फ 5 रुपये में पाएं सुरक्षित इलाज भारत एक घंटा पहले 3
बरसात के मौसम में बकरियों को एंटरोटॉक्सिमिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। केवल 5 रुपये के पंजीयन शुल्क पर बकरियों का टीकाकरण किया जा रहा है।

मानसून और पशुपालन की चुनौतियां

बकरी पालन से जुड़े लोगों के लिए बरसात का मौसम सबसे कठिन समय होता है। इस दौरान वातावरण में नमी और तापमान में बदलाव के कारण बकरियां जल्दी बीमार पड़ती हैं। यदि पशुपालक थोड़ी सी भी लापरवाही करते हैं, तो उन्हें न केवल पशुओं के स्वास्थ्य से, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान से भी जूझना पड़ सकता है। पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने इस मौसम में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि बकरियों को सुरक्षित रखा जा सके।

एंटरोटॉक्सिमिया का बढ़ता खतरा

बालोद पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. डी. के. सिहारे ने चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान बकरियों में एंटरोटॉक्सिमिया नामक बीमारी फैलने का खतरा काफी अधिक होता है। यह एक गंभीर समस्या है जो सीधे तौर पर बकरियों की जान पर बन आती है। इस बीमारी की चपेट में आने पर बकरियों में मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं:

  • लगातार पानी जैसे पतले दस्त होना।
  • नाक से पानी बहना।
  • लगातार खांसी और सर्दी महसूस होना।

डॉ. सिहारे के अनुसार, अगर इन लक्षणों को शुरुआत में ही नहीं पकड़ा गया, तो यह स्थिति काफी विकट हो सकती है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी असामान्य लक्षण को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लें।

केवल 5 रुपये में सुरक्षा कवच

पशु चिकित्सा विभाग ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत बकरियों को निशुल्क टीकाकरण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों को केवल 5 रुपये का पंजीयन शुल्क देना होता है। विभाग की टीमें बालोद जिले के उन सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं जहां बकरी पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है। सभी पालकों से अपील की गई है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण जरूर सुनिश्चित करें ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

बारिश में रखें खास सावधानी

टीकाकरण के अलावा, पशुपालकों को अपनी प्रबंधन शैली में भी बदलाव करने की आवश्यकता है। डॉ. सिहारे ने बताया कि सबसे बड़ी गलती बकरियों को बारिश में भीगने देना है। लगातार भीगने से बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और वे सर्दी-खांसी की चपेट में आ जाती हैं। इसके लिए जरूरी है कि:

  • तेज बारिश के दौरान बकरियों को चराने के लिए बाहर न भेजें।
  • उन्हें हमेशा सूखे, हवादार और सुरक्षित स्थान पर रखें।
  • नई घास के साथ पेट में कीड़े जाने का खतरा रहता है, इसलिए समय-समय पर कृमिनाशक दवाएं (डीवर्मिंग) जरूर दें।

कीड़ों के संक्रमण के कारण बकरियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं, जिसका सीधा असर उनके विकास और दूध उत्पादन पर पड़ता है।

इलाज में देरी न करें

पशु चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यदि बीमारी की पुष्टि हो जाती है, तो इसका उपचार एंटीबायोटिक और सर्दी-खांसी की सामान्य दवाओं से संभव है। हालांकि, इलाज की सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितनी जल्दी शुरू किया गया है। यदि किसान बीमारी को समझकर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करते हैं, तो नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। इसलिए, मानसून के इस मौसम में बकरियों की नियमित जांच और स्वास्थ्य निगरानी को अपनी प्राथमिकता बनाएं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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