यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा संपन्न: 21.92 लाख ने दिया इम्तिहान, दर्ज हुए 12 मुकदमे, 9 गिरफ्तार करियर एक घंटा पहले 2
उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा 8 से 10 जून तक तीन दिन चली, जिसमें 21,92,236 अभ्यर्थी शामिल हुए। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक 12 मुकदमे दर्ज किए गए और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

उत्तर प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा अब पूरी हो चुकी है। 8 जून से 10 जून के बीच चली इस परीक्षा में 21 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इस पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और जहां भी गड़बड़ी की कोशिश हुई, वहां तुरंत कार्रवाई की गई।

तीन दिन तक 75 जिलों में हुई परीक्षा

कांस्टेबल भर्ती की यह लिखित परीक्षा लगातार तीन दिन — 8, 9 और 10 जून 2026 को — आयोजित की गई। प्रदेश के 75 जिलों में बनाए गए 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो-दो पालियों में अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इतने बड़े पैमाने की भर्ती प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती थी, जिसे पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सफलतापूर्वक निभाया।

21.92 लाख अभ्यर्थी हुए शामिल

भर्ती बोर्ड के अनुसार इस परीक्षा के लिए कुल 28,86,798 अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया था। इनमें 19,62,561 पुरुष और 9,24,237 महिला अभ्यर्थी शामिल थीं। तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 21,92,236 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। इस तरह उपस्थिति का प्रतिशत 75.94 रहा, जिसे परीक्षार्थियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के रूप में देखा जा रहा है।

आधुनिक तकनीक से रोकी गई नकल

इस बार बोर्ड ने नकल और फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। ई-केवाईसी सत्यापन, बायोमेट्रिक मिलान, सीसीटीवी निगरानी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग जैसे कदम उठाए गए। हर केंद्र पर सख्त सुरक्षा और तकनीकी जांच के चलते नकल करने या किसी दूसरे की जगह परीक्षा देने वालों की पहचान तत्काल हो सकी।

फर्जी आधार कार्ड के साथ पकड़ा गया अभ्यर्थी

गौतमबुद्ध नगर स्थित मिहिर भोज पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी की ई-केवाईसी जांच में गड़बड़ी सामने आई। पड़ताल में पता चला कि वह फर्जी आधार कार्ड के सहारे परीक्षा देने पहुंचा था। इस मामले में संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

दूसरे की जगह परीक्षा देता मिला युवक

अलीगढ़ के डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक युवक किसी दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर परीक्षा देता हुआ पकड़ा गया। बायोमेट्रिक मिसमैच और दस्तावेजों की जांच में यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। इस मामले में न केवल मुकदमा दर्ज किया गया, बल्कि आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया।

अफवाह फैलाने वालों पर भी शिकंजा

परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और झूठी जानकारी फैलाने के मामले भी सामने आए। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर पर मिली शिकायतों के आधार पर यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर सक्रिय कई अकाउंट्स के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। इन पर भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

कानपुर में संदिग्ध अभ्यर्थी से पूछताछ

कानपुर नगर के एक परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी को संदेह के आधार पर रोका गया। शुरुआती जांच में उसके दस्तावेजों पर सवाल उठे, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई। मामले की विस्तृत पड़ताल के बाद जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अब तक 12 मुकदमे, 9 गिरफ्तार

बोर्ड के मुताबिक परीक्षा से जुड़े विभिन्न मामलों में अब तक कुल 12 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 9 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। बोर्ड ने दो टूक कहा है कि फर्जीवाड़ा या अफवाह फैलाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

भर्ती बोर्ड ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सख्ती बरती जा रही है। परीक्षा के सफल आयोजन में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, तकनीकी टीमों और परीक्षा केंद्रों की अहम भूमिका रही। बोर्ड का कहना है कि आगे भी भर्ती प्रक्रिया इसी पारदर्शिता और सख्ती के साथ पूरी की जाएगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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